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मूसा नदी के पेट में मिट्टी भरने का सिलसिला जारी

एक ऐसे वक़्त जब सरकारी ओहदेदार 15 अगस्त की तैयारीयों में मसरूफ़ थे और बादअज़ां रियासत भर में मुनाक़िद होने वाले जामे सर्वे के लिए मसरूफ़ हो गए। उसी दौरान चंद अफ़राद मूसा नदी में श्मशान घाट से मुत्तसिल एक वसीअ हिस्से पर क़ब्ज़ा करने में

एक ऐसे वक़्त जब सरकारी ओहदेदार 15 अगस्त की तैयारीयों में मसरूफ़ थे और बादअज़ां रियासत भर में मुनाक़िद होने वाले जामे सर्वे के लिए मसरूफ़ हो गए। उसी दौरान चंद अफ़राद मूसा नदी में श्मशान घाट से मुत्तसिल एक वसीअ हिस्से पर क़ब्ज़ा करने में मसरूफ़ देखे गए।

क़ारईन सियासत की जानिब से शिकायात मौसूल होने पर जब हम ने मज़कूरा मुक़ाम का दौरा किया तो हम ने देखा कि श्मशान घाट से मुत्तसिल मूसा नदी की एक वसीअ अराज़ी पर लारियों से मिट्टी ला ला कर डाला जा रहा है और ज़मीन के एक बड़े हिस्से को हड़पने की तैयारी की जा रही है। सवाल ये है कि लबे सड़क बहादुर पूरा ता पुराना पुल रातों रात इस मुक़ाम पर मिट्टी डाल कर तक़रीबा 2 एकड़ अराज़ी को हड़पने की कोशिश की जा रही है।

मगर इस के बावजूद महकमा बल्दिया ख़ामूश है। हालाँकि एम आर ओ का दफ़्तर और पुलिस स्टेशन दोनों यहां से बिलकुल करीब में ही मौजूद है मगर क़ाबिज़ीन के ख़िलाफ़ क़सदन चश्मपोशी अख़्तियार की जा रही है।

जिस के नतीजे में मज़कूरा अफ़राद बेखौफो ख़तर अपने नापाक मंसूबों की तकमील में मसरूफ़ हैं। अवाम का सवाल ये है कि उन अफ़राद को कौन से महकमा ने NOC जारी किया है? अवाम का कहना है कि मज़कूरा अफ़राद की इस बेखौफ हरकत से ऐसा महसूस होता है कि इस कीमती अराज़ी पर क़ब्ज़ा में लेने के लिए उन्हों ने नीचे से ऊपर तक सब का ख़्याल रखा गया है।

वाज़ेह रहे कि साबिक़ा किरण कुमार हुकूमत ने मूसा नदी प्रोजेक्ट के लिए 45 करोड़ रुपये जारी किया था मगर इस का ताहाल कोई फ़ायदा नहीं हो सका। क़ब्ल अज़ीं हुकूमत ने मूसा नदी की आबगीर इलाक़ा पर क़ाबिज़ पट्टेदारों को मुआवज़ा दे कर तख़लिया कराने का फैसला किया था।

लिहाज़ा अर्बाबे मजाज़ को चाहीए कि वो उन अफ़राद के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे। जो रातों रात इस कीमती अराज़ी को हड़प लेने का मंसूबा रखते हैं साबिक़ा हुकूमतों से मूसा नदी के तहफ़्फ़ुज़ के नाम पर करोड़ों रुपये ज़ाए कर दीए हैं और तहफ़्फ़ुज़ के एलानात अख़्बारात और टेली वीज़न तक ही महदूद हो कर रह गए। अब देखना ये है कि टी आर एस हुकूमत मूसा नदी के तहफ़्फ़ुज़ के लिए कोई अमली इक़दामात करती है या नहीं।

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