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मेरे बच्चों के साथ वैसा रिश्ता न हो जैसा मेरे पिता के साथ हैं : रणबीर कपूर

नई दिल्ली: ऋषि कपूर की बायोग्राफी ‘खुल्लम खुल्ला’ रिलीज हो चुकी है. इस किताब में ऋषि ने अपने करियर, सितारा पुत्र होने के फायदों और उसके प्रेशर, कम उम्र में मिली सफलता, असफलता के बाद के डिप्रेशन, अपने पिता, पत्नी और बच्चों से अपने रिश्तों को लेकर काफी कुछ लिखा है. इस किताब में ऋषि ने लिखा है कि उनके बेटे रणबीर कपूर के साथ उनका रिश्ता थोड़ा औपचारिक है, वैसा ही जैसा उनका अपने पिता राज कपूर से था. वहीं रणबीर ने भी लिखा है कि वह अपने पिता से बेहद प्यार करते हैं लेकिन कई बार उन्हें दोनों के बीच की दूरियां खलती हैं. रणबीर और ऋषि दोनों का मानना है कि रणबीर अपनी मां नीतू कपूर के ज्यादा करीब हैं.

ऋषि की आत्मकथा की प्रस्तावना में रणबीर ने अपने और ऋषि के रिश्तों को औपचारिक बताते हुए लिखा है कि वह नहीं चाहते कि उनके बच्चों से उनके संबंध वैसे रहें जैसे उनके पिता के साथ हैं. रणबीर ने लिखा है कि पिता-पुत्र का संबंध पूरी तरह से आदरभाव का होता है और उन्होंने भी ऋषि के साथ अपने रिश्तों में एक निश्चित सीमा को कभी भी लांघा नहीं है.

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रणबीर ने प्रस्तावना में लिखा है, ”मैं अपनी मां के बेहद करीब हूं. मुझे लगता है कि मेरे डैड ने मेरे साथ संबंधों को वैसा ही स्वरूप दिया जैसे वह अपने पिता के साथ रखते थे. और यह सच है कि मैंने कभी भी उनके साथ एक निश्चित सीमा को लांघा नहीं है. लेकिन इससे किसी प्रकार की कोई कमी या खालीपन महसूस नहीं हुआ. मेरी कभी-कभी इच्छा होती है कि मैं उनके साथ दोस्ताना व्यवहार रखूं या उनके साथ अधिक वक्त बिताऊं.” अभिनेता ने लिखा कि भविष्य में वह अपने बच्चों के साथ इस तरह के औपचारिक संबंध नहीं रखना चाहेंगे.

रणबीर ने लिखा, ”मैं अपने पिता से बेहद प्यार करता हूं और उनके लिए मेरे दिल में अपार सम्मान है. मैं उनसे काफी प्रेरित रहा हूं और कभी भी मैं उन्हें ठेस नहीं पहुंचाना चाहता हूं. मैं जानता हूं कि उनके दिल में भी मेरी इच्छाओं का स्थान सबसे ऊपर रहता है. वे मेरे काम में आर्थिक पहलुओं का भी ख्याल रखते हैं. इससे अब मैं उनके और ज्यादा करीब हो गया हूं.”

रणबीर का यह भी मानना है कि कभी-कभी वह अपने पिता से इस दूरी को महसूस करते हैं पर इसके लिए कुछ कर नहीं पाते. उन्होंने लिखा, ‘कभी-कभी मुझे लगता है मैं उन्हें फोन करूं और पूछूं ‘डैड, आप कैसे हैं?’ पर हमारा रिश्ता वैसा नहीं है. जब मेरी शादी होगी और मेरे बच्चे होंगे तो मैं नहीं चाहता कि मेरा रिश्ता मेरे बच्चों से उतना औपचारिक रहे जितना मेरा मेरे पिता से है. मैं उनका दोस्त बनकर उनसे जुड़ा रहना चाहता हूं.”

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