Friday , October 20 2017
Home / Hyderabad News / मेहनत कश मुस्लिम जोड़ा औलाद को तालीम-याफ़ता बनाने कोशां

मेहनत कश मुस्लिम जोड़ा औलाद को तालीम-याफ़ता बनाने कोशां

नुमाइंदा ख़ुसूसी-औलाद की तालीम-ओ-तर्बीयत फिर उन के लिए मकान माँ बाप का अरमान होता है और इस की तकमील के लिए वो सख़्त मेहनत-ओ-मशक़्क़त करते हैं । मक़सद सिर्फ यही होता है कि औलाद का मुस्तक़बिल रोशन हो । हर तरह की सहूलतें हासिल हों । आईए हम

नुमाइंदा ख़ुसूसी-औलाद की तालीम-ओ-तर्बीयत फिर उन के लिए मकान माँ बाप का अरमान होता है और इस की तकमील के लिए वो सख़्त मेहनत-ओ-मशक़्क़त करते हैं । मक़सद सिर्फ यही होता है कि औलाद का मुस्तक़बिल रोशन हो । हर तरह की सहूलतें हासिल हों । आईए हम आप की मुलाक़ात एक ऐसे जोड़े से कराते हैं जो ख़ुद तो तालीम-याफ़ता नहीं है लेकिन इन का मक़सद है कि इन की औलाद ज़ेवर तालीम से आरास्ता हो उसी मक़सद के पेशे नज़र दोनों मियां बीवी सख़्त मेहनत करते हैं । बंजारा हिलज़ में ज़हरा नगर एक मुस्लिम इलाक़ा है ।

ये मुस्लिम आबादी मेहनत कश तबक़ात की है लेकिन इस मुहल्ला में एक ऐसा ख़ानदान भी रहता है जो मेहनत कर के बच्चों की तालीम पर ख़र्च करता है । ये ख़ानदान 30 साला मुहम्मद जावेद , उन की अहलिया मोनसा प्रवीण दो बेटे और लड़की पर मुश्तमिल है । बच्चे ख़ानगी स्कूल में तालीम हासिल कररहे हैं । बंजारा हिलज़ में दवाख़ाना रेनबो के बाज़ू फुटपाथ पर मियां बीवी गुज़शता दो साल से घर पर तैय्यार कर के दोपहर का खाना फ़रोख़त करते हैं उन के डीशस में चिकन बिरयानी , बूटी राईस , चिकन राईस , मटन बिरयानी , लीमन राईस , वेज बिरयानी , अंडा राईस शामिल हैं । अच्छी मिक़दार में पेट भर वाजिबी क़ीमत पर सुबह 11-30 बजे से दोपहर 3 बजे तक सख़्त धूप में ग्राहकों की ख़िदमत करते नज़र आते हैं ।

प्रवीण आर्डर के मुताबिक़ गाहक को प्लेट मंज डाल कर देती और पैसों का हिसाब रखती हैं । रोज़ाना बारह किलो चावल घर पर तैय्यार करती हैं । शौहर जावेद बाज़ार से सौदा लाने में मसरूफ़ रहते हैं । ज़हरा नगर में कराए के मकान में मुक़ीम जावेद कहा कहना है कि रोज़ाना 300 रुपय कमा लेते हैं ।वैसे बंजारा हिलज़ में कई लोग इस तरह का काम करते हैं । इन का कहना है कि गाहक ज़्यादा हैं क्यों कि हम पेट भर खाना देते हैं । कोई मिक़दार मुक़र्रर नहीं है । मेरी बीवी सफ़ाई का ख़ास ख़्याल रखती है । ये तमाम डिशेस वो ख़ुद बनाती है मैं बाज़ार से ख़रीदी करता हूँ ।

फुटपाथ की होटल को 3 बजे बंद कर के दूसरे दिन की तैय्यारी में लग जाते हैं । रात में मेरी बीवी बच्चों की तालीम पर भी तवज्जा देती है । हमारा मक़सद यही है कि हम अपने बच्चों को अच्छी तालीम दिलाएं । जावेद की पैदाइश नागपुर में हुई । हैदराबाद 8 साल की उम्र में आए थे । शुरू में होटल में काम किया फिर रक्षा चलाया । 9 साल तक इस तरह गुज़र गए । इस के बाद ये काम शुरू किया । प्रवीण से उन की शादी हज़रत यूसुफ़ बाबाऒ की दरगाह में हुई । जहां एक अर्सा से बेसहारा मुस्लिम लड़कीयों की शादियां कराई जा रही हैं ।

इन शादीयों में जोड़ों को ज़रूरी सामान भी दिया जाता है । अब इस जद्द-ओ-जहद के बाद दोनों मियां बीवी एक ख़ुशहाल ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं । इन का कहना है कि हम इस क़दर मसरूफ़ रहते हैं कि दिन रात , माह-ओ-साल कब गुज़र जाते हैं हम को इस का पता भी नहीं चलता । मेरी बीवी हमेशा हिजाब में रहती है । अगर वो साथ ना देती तो मेरे लिए कारोबार करना किसी तरह भी मुम्किन ना था । प्रवीण रात में अरबी भी सीख रही है ।

क़ारेईन हम ने देखा कि ये जोड़ा दोपहर के वक़्त तो बेहद मसरूफ़ रहता है क्यों कि ये ख़ानदान सड़क से गुज़रने वाले टैक्सी ड्राईवरस आटो वाले हज़रात , अतराफ़ के ऑफ़िसों के स्टाफ़ केलिए ये मुस्लिम जोड़ा पेट भर खाना गर्मगर्म वाजिबी दामों पर निहायत ख़ुशअख़लाक़ी से फ़राहम करता है । यहां आने वाले भी ख़ुश होते हैं और ये मुस्लिम ख़ानदान भी इज़्ज़त से रिज़्क हलाल कमा लेता है अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए ज़िंदगी गुज़ार रहा है । अल्लाह तआला उन के रिज़्क मैं कुशादगी अता फ़रमाए और उन के बच्चों को तालीम से आरास्ता करे । आमीन ।।

TOPPOPULARRECENT