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मैं किस धर्म का हूँ इससे किसी को कोई मतलब नहीं होना चाहिए: जस्टिस टी एस ठाकुर

नई दिल्ली: इंसान और भगवान में जो रिश्ता होता है वह बहुत ही पर्सनल होता है ऐसा कहना है सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर का। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस आर एफ नरीमन की पारसी धर्म पर लिखी गई किताब ‘दि इनर फायर, फेथ, चॉइस एंड मॉडर्न-डे लिविंग इन जोरोऐस्ट्रीअनिजम’ का लांच करते हुए सोसाइटी में शान्ति और सहिष्णुता के बारे में बात की। आध्यात्मिकता का जिक्र करते हुए ठाकुर ने कहा कि इंसान और भगवान के बीच का रिश्ता बहुत निजी होता है इससे दूसरे किसी को किसी भी तरह का कोई मतलब नहीं होना चाहिए।

जनसत्ता की खबर के मुताबिक ठाकुर का कहना है कि जितने लोग राजनीतिक विचारधाराओं के कारण नहीं मारे गए, उससे कहीं ज्यादा लोगों की जान धार्मिक युद्धों में गई है। इस दुनिया की ज्यादातर तबाही, नुकसान और खून-खराबे धार्मिक मान्यताओं की वजह से ही हुए हैं।

ठाकुर ने कहा कि मेरा धर्म क्या है ? मैं ईश्वर से खुद को कैसे जोड़ता हूं ? ईश्वर से मेरा कैसा रिश्ता है ? इन चीजों से किसी और को कोई मतलब नहीं होना चाहिए।

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