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‘मोदी की एलानात ज़ाब्ता एखलाक कानून की खिलाफवर्जी है’

पटना : वजीरे आजम के ‘मन की बात’ प्रोग्राम में एक जनवरी 2016 से ग्रुप- बी, सी और डी के नॉन गेजेटेड ओहदे के लिए इंटरव्यू ख़त्म करने की एलान को जेडीयू और कांग्रेस ने इंतिख़ाब ज़ाब्ता एखलाक कानून का खिलाफवर्जी बताया है। जेडीयू लीडर केसी त्यागी, कांग्रेस लीडर आरपीएन सिंह और सीनियर वकील केटीएस तुलसी ने ‘मन की बात’ प्रोग्राम में ऐसी एलनात होने पर सख्त रद्दो तनकीद की है।
केसी त्यागी ने कहा, “एलेक्शन कमीशन की नरमी का फायदा उठाते हुए, हमारे मुसलसल दरख्वास्त के बाद भी एलेक्शन कमीशन वजीरे आजम की मनमानी को रोकने में नाकाम रहा है। ” उन्होंने मांग की कि एलेक्शन कमिश्नर की रिटायरमेंट के बाद उन्हें कोई दीगर सरकारी ओहदे नहीं दिया जाना चाहिए और चीफ़ जस्टिस पर भी ऐसी ही रोक लगाई जानी चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि आइंदा पार्लियामेंट सेशन में पार्टी ये मुद्दा उठाएगी। वहीं सीनियर वकील केटीएस तुलसी ने कहा, “वजीरे आजम का इंटरव्यू ख़त्म करने और दलितों और आदिवासियों को स्कॉलरशिप दिए जाने की ऐलान करना इंतिख़ाब ज़ाब्ता एखलाक कानून का खिलाफवर्जी है। ”
उन्होंने कहा कि दस्तूरुल अमल के मुताबिक जब इंतिख़ाब ज़ाब्ता एखलाक कानून लागू हो तब किसी तबके की किसी क़िस्म की माली मदद की एलान करना वोटरों को लुभाने की कोशिश होती है। तुलसी ने कहा, “ऐसा लगता है कि बड़े मोदी (नरेंद्र) और छोटे मोदी (सुशील) को कानून का कोई डर नहीं है। एलेक्शन कमीशन भी इनकी एलानात को नज़रअंदाज़ कर रहा है। ”

 

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