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मोदी के करीबी ज़फर सरेशवाला का बयान, यूसीसी से मुसलमानों के साथ-साथ हिंदुओं को भी नुक्सान

नई दिल्ली: मोदी के करीबी सहयोगी और मौलाना आजाद उर्दू विश्वविद्यालय के कुलपति जफर सारेशवाला ने गुरुवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) द्वारा यूसीसी को “विभाजनकारी” कहे जाने की आलोचना की और उन्होंने कहा की इस कोड में कई खामियां हैं जिसका हिंदुओं को ख्याल रखने की जरूरत है।
“मुसलमानों की एक तिहाई आबादी दुनिया भर के गैर-मुस्लिम देशों में अल्पसंख्यकों के रूप में रहती है,” जफर सारेशवाला ने मुंबई मिरर को बताया। “इसलिए यूसीसी हमारे लिए एक समस्या नहीं है। लेकिन यह हिंदुओं के लिए एक बड़ी समस्या ज़रूर है। यह बात सितम्बर 1972 अंक में ऑर्गनाइजर पत्रिका के संपादक केवल रतन मलकानी को दिए एक साक्षात्कार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक गुरुजी गोलवलकर ने कही थी।
उन्होंने यह कह कर यूसीसी का विरोध किया कि यह विविध समुदायों और संस्कृतियों वाले देश भारत के लिए अनुकूल नहीं है, “उन्होंने आगे कहा। सारेशवाला ने आगे कहा भारत जैसे सांस्कृतिक विविधताओं वाले देश में यूसीसी के बारे में बात करना ही ‘निरर्थक’ है और कहा कि इस तरह के कोड मुसलमानों की तुलना में हिंदुओं के लिए अधिक परेशानी पैदा करेंगे।
हिन्दू अविभाजित परिवारों को मिलने वाली कर छूट और उत्तराधिकार कानून में संशोधन हिंदुओं को अधिक चोट करेंगे, “उन्होंने कहा। नागरिक कानून के सम्बन्ध में मुसलमानों के केवल दो विवादास्पद मुद्दे है; बहुविवाह और ट्रिपल तलाक | “इस्लामीक न्यायशास्त्र के अनुसार, एक ही बार में ट्रिपल तलाक अस्वीकार्य है। वास्तव में, पवित्र कुरान में ट्रिपल तलाक के लिए कोई प्रावधान ही नहीं है।
बहुविवाह भी इतना व्यापक रूप से प्रचलित नहीं है जितना इसको माना जाता है, “उन्होंने कहा। उन्होंने ट्रिपल तलाक जारी के मुद्दे पर मुस्लिम महिलाओं के सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ने पर भी अपनी निराशा व्यक्त की है। “यह मसला आसानी से समुदाय के अन्दर ही सुलझाया जा सकता था |
महिलाओं को अदालत जाने की क्या ज़रूरत थी? इससे यह ज़रूर स्पष्ट हो गया है कि वे मुस्लिम मौलवियों पर विश्वास नहीं करती हैं,”

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