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मोदी जी 50 दिन सब्र करने के बाद क्या सभी के खाते में 15 लाख आ जाएंगे: लालू

राजद के अध्यक्ष लालू ने रविवार शाम ताबड़तोड़ करीब 12 ट्वीट कर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए विमुद्रीकरण को गलत बताया. उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “हम कालेधन के विरुद्ध हैं, पर आपके कृत्य में दूरदर्शिता और क्रियान्वयन का पूर्ण अभाव दिख रहा है. आम आदमी की सहूलियत का ख्याल रखना चाहिए.”
सरकार द्वारा 500 और 1000 के नोटों पर प्रतिबंध लगाए जाने के पांच दिन बाद रविवार को इस मामले में चुप्पी तोड़ते हुए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा.

उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “हम कालेधन के विरुद्ध हैं, पर आपके कृत्य में दूरदर्शिता और क्रियान्वयन का पूर्ण अभाव दिख रहा है. आम आदमी की सहूलियत का ख्याल रखना चाहिए.” नोटबंदी कर जापान गए मोदी ने लौटने पर जो भाषण दिए, उन पर तंज कसते हुए लालू ने कहा कि ‘नाटकीय’ भाषणों से आम जनता को न सांत्वना मिलेगी और न ही दुखों का अंत होगा.

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने एक अन्य ट्वीट में मोदी के वादे पर तंज कसते हुए लिखा, “मोदी जी, देश को भरोसा दीजिए कि जनता को दो माह पूरी असुविधा देने और कालेधन की उगाही के बाद सबके खाते में 15 लाख रुपये आएंगे.” लालू यहीं नहीं रुके. उन्होंने आगे कहा कि अगर ये सब करने के बाद भी लोगों को 15 लाख रुपये नहीं मिले, तो इसका मतलब होगा कि यह ‘फर्जिकल स्ट्राइक’ था और इसके साथ ही आम जनता का ‘फेक-एनकाउंटर’ भी.
मोदी सरकार से सवाल करते हुए लालू ने ट्वीट किया, “क्या सरकार 50 दिन के बाद आंकड़ा सावर्जनिक करेगी कि खातों में पैसे होने के बावजूद कितने लोग खाने और इलाज के अभाव और सदमे में मारे गए. मोदी बताएं कि अगर भ्रष्टाचार और कालाधन खत्म करना चाहते हैं तो 2000 रुपये का नोट क्यों बनाया? आपकी इस मंशा पर देश को शंका है.”

उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि सरकार यह बताए कि बैंकों का लाखों-करोड़ों रुपये डकारने वाले ‘डिफॉल्टर्स’ पर क्या कार्रवाई कर रहे हैं? लालू ने अपने खास अंदाज में एक ट्वीट में लिखा, “डिफॉल्टर पूंजीपति पांच सितारों में, आम आदमी कतारों में, आप विदेशी नजारों में. और ऊपर से कह रहे हो जो कतारों में है वो चोर-नाकारे हैं.”

लालू ने आगे कहा, “नाटकीय भाषणों से आम जनता को न सांत्वना मिलेगी और न दुखों का अंत होगा. स्थिति विस्फोटक हो रही है. लोग परेशान हैं और आप भाषण पर भाषण फेंके जा रहे हैं.”

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