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हिंदू संगठनों के बीच नाराजगी कहा, अहंकारी हैं मोदी नहीं बनना चाहिए था प्रधानमंत्री

दिल्ली : प्रधानमंत्री मोदी को ले के हिंदू संगठनों के बीच जिस तरह की नाराजगी पैदा हो रही है वो अब खुल के सामने आने लगी है। लगातार कार्यक्रमों में मोदी से हिंदुत्‍व के मुद्दे को किनारे करने पर सवाल पूछे जा रहे हैं। गौरतलब है कि गोरक्षकों को गुंडा कहने पर हिंदू महासभा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लीगल नोटिस भेजने का फैसला किया था। हिंदू महासभा के स्वामी चक्रपाणि ने कहा था कि पीएम ने किस आधार पर 80 फीसदी गौरक्षकों को गुंडा करार दिया है। इसके लिए वो पीएम को लीगल नोटिस भेजेंगे। वहीं हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रेसीडेंट चंद्रप्रकाश कौशिक ने कहा था कि ‘नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के काबिल ही नहीं है।

वह वाजपेयी की तरह उसी तरह लौटेंगे जिस तरह वह 2004 में लौटे थे।’ उधर, गौरक्षकों के मुद्दे पर गुजरात में विश्व हिन्दू परिषद ने भी कड़ा एतराज जताया है। विहिप ने प्रेस नोट जारी करते लिखा कि ‘1 लाख से ज्यादा गायों का क़त्ल हो रहा है, बावजूद कड़ा कानून नहीं है। गौरक्षक गुंडों के वेश में आते हैं, इस बयान से गौरक्षकों को सदमा लगा है।विश्‍व हिन्‍दू महासंघ एवं युवा हिन्‍दू वाहिनी ने अपने कार्यकर्ता सम्‍मेलन के साथ-साथ कवि सम्‍मेलन भी आयोजित कराया। 25 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम में प्रभात परवाना नाम के कवि ने नरेंद्र मोदी पर एक कविता सुनाई। वीर रस की कविता में परवाना प्रधानमंत्री से पूछते हैं कि अच्‍छे दिन कब आएंगे। अपनी कविता में प्रभात ने कई विवादित मुद्दों पर कलम चलाई है। प्रभात ने कविता में कहा है कि मोदी सबसे ऊंची कुर्सी पाकर ‘अहंकार में डूब’ गए हैं। प्रभात ने पूछा है कि ‘क्‍या यह मोदी वही मोदी है जो गुजरात से आया था?

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