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मोदी बरत के ख़िलाफ़ कांग्रेस क़ाइदीन की भूक हड़ताल

गुजरात के अवाम पर कौनसा आसमान टूट पड़ा है, चीफ़ मिनिस्टर को तमाशा करने की क्या ज़रूरत है, वघीला का सवाल

गुजरात के अवाम पर कौनसा आसमान टूट पड़ा है, चीफ़ मिनिस्टर को तमाशा करने की क्या ज़रूरत है, वघीला का सवाल
अहमदाबाद, 17 सितंबर (पी टी आई) गुजरात के कांग्रेस क़ाइदीन शंकर सिन्हा वघीला और अर्जुन मोधवाडिया ने आज अपनी भूक हड़ताल शुरू करदी जो चीफ़ मिनिस्टर नरेंद्र मोदी के यहां सहि रोज़ा बरत का जवाबी इक़दाम है। कांग्रेस क़ाइदीन ने अपनी भूक हड़ताल मोदी के बरत से एक घंटा क़बल शुरू की, जिस का आग़ाज़ लग भग 10 बजे दिन हुआ। कांग्रेस ने मोदी के बरत को फाईव स्टार क़रार दिया है क्योंकि ये एयरकंडीशनड हाल में मुनाक़िद किया जा रहा है। मोदी ने अपना 72 घंटे का बरत गुजरात यूनीवर्सिटी के कनवेनशन हाल में शुरू किया है। अप्पोज़ीशन क़ाइदीन ने निशानदेही की कि वघीला और मोधवाडिया साबरमती आश्रम के रूबरू फुटपाथ पर बैठे हैं। वघीला ने अख़बारी नुमाइंदों से बात करते हुए कहा, आज के नज़म-ओ-नसक़ में जहां फाईव और सेवन स्टार कल्चर को ज़ाती मुफ़ाद में इमेज को सुधारने केलिए बतौर वसीला इस्तिमाल किया जा रहा है, मैं आप लोगों (मीडीया) के ज़रीया पूछना चाहता हूँ कि बरत रखने की ज़रूरत किया है। क्या गुजरात के अवाम पर आसमान टूट पड़ा है? साबिक़ चीफ़ मिनिस्टर ने कहा, कई करोड़ रुपय की सरकारी रक़म ख़र्च करदेने की क्या ज़रूरत है। अगर वो बरत रखना चाहते हैं तो वो (मोदी) घर पर भी ऐसा करसकते थे। चीफ़ मिनिस्टर की हैसियत से इस तरह का तमाशा करने की कोई ज़रूरत ना थी। ये बद उनवान हुकूमत है, ऐसी हुकूमत जो लोक एवकत से बचती रही है, और हम ये चीज़ मलिक के अवाम को दिखा देना चाहते हैं। वघीला ने मज़ीद कहा कि इस हुकूमत के ख़िलाफ़ कुरप्शन के इल्ज़ामात हैं। रियासत का सरकारी क़र्ज़ 1.30 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है, जिस के ताल्लुक़ से गुजरात के अवाम वाक़िफ़ नहीं हैं। इस किस्म की तरक़्क़ी है जिस की हम बात कर रहे हैं। वघीला ने कहा कि चीफ़ मिनिस्टर ने अपने बरत का ऐलान इस सुप्रीम कोर्ट हुक्मनामा के बाद क्या, जिसे वो माबाद गोधरा फ़सादाद केस में अपने लिए क्लीनचिट बावर करते हैं। अब, वो इस तरह का बरत रखते हुए ख़ुद को अक़ल्लीयतों के मसीहा के तौर पर पेश करना चाहते हैं और ये दिखाना चाहते हैं कि वो उन के मुहाफ़िज़ हैं। वघीला ने इद्दिआ क्या, अगर चीफ़ मिनिस्टर की जानिब से बरत केलिए कोई माक़ूल जवाज़ हो तो हम समझ सकते हैं। वो कह रहे हैं ये बरत सद भावना (हम आहंगी) केलिए है, लेकिन उन के बरत की बुनियाद नाटक, झूट और बदउनवानी पर है।
ईल जे पी की तन्क़ीद, जया ललीता की वज़ाहत
दरीं असना मोदी के बरत को ईल जे पी ने सयासी शेबदा बाज़ी क़रार दिया जबकि चीफ़ मिनिस्टर टामलनाडो जया ललीता ने कहा कि इस बरत की ताईद का गै़रज़रूरी मतलब ना निकाला जाय। ईल जे पी लीडर राम विलास पासवान ने सोमनाथ में कहा कि मोदी ख़ुद को सकीवलर लीडर के तौर पर उभारना चाहते हैं और वज़ारत-ए-उज़मा पर नज़र रखते हुए क़ौमी लीडर के तौर पर अपना इमेज बेहतर बनाने कोशां हैं। चेन्नाई में जया ने कहा कि उन्हों ने बस ख़ैरसिगाली का इज़हार किया और अपने इक़दाम के पसेपर्दा सयासी तरकीब में तबदीली की बातों को मुस्तर्द करदिया।

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