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मोदी राज में बढ़े किसानों की आत्महत्या के मामले: रिपोर्ट

नई दिल्ली: पीएम मोदी द्वारा साल 2014 में सत्ता में आने से पहले दिए जा रहे भाषणों में एक मुद्दा ये भी था “किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्या” मोदीजी ने वादा किया था कि वह सत्ता में आ गए तो कोई भी किसान आत्महत्या करने को मजबूर नहीं होगा। लेकिन आज का मंजर कुछ और ही कहता है। दरअसल साल 2014 के बाद किसानों द्वारा आत्महत्या के मामलों के कोई कमी नहीं आई बल्कि ऐसे मामलों में इजाफा ही हुआ हैं।

 ‘एक्सिडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड इन इंडिया 2015’ नामक रिपोर्ट में। जिसके जरिये पता चलता है कि चुनावों के दौरान मोदीजी द्वारा बोली गई बातों कितनी सच हैं। 30 दिसंबर को जारी की गई इस लिस्ट में 2014 के मुकाबले 2015 में किसानों और कृषि मजदूरों की कुल आत्महत्या में दो फीसदी बढ़त हो चुकी हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के तहत साल 2014 में जो आत्महत्या के जो आंकड़े कुल 12360थे वो साल 2015 में 12602 हो चुके है।

किसानों की मौत के पीछे का कारण कर्ज और पैसों के कमी हैं। इन कारणों से 38.7 फीसदी किसानों ने आत्महत्या की। इन आत्महत्या के सबसे ज्यादा मामले देश के सात राज्यों में से सामने हाय हैं जोकि बीजेपी शासित राज्य हैं। इनमें महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, तामिलनाडु, तेलांगना शामिल हैं। गौरतलब है कि चुनावों के दौरान किसानों के मुद्दों को लेकर हमेशा वाहवाही लूटते हैं लेकिन सच्चाई से हमेशा पल्ला झाड़ते हैं।

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