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मोदी राज में मुमकिन नहीं किसानों के अच्छे दिन

नई दिल्ली: अगले महीने सत्ता के दो साल पूरे कर रही बीजेपी सरकार की लोकसभा चुनावों के दौरान किसानो को दिखाई गई हजारों उम्मीदों और सपनों में से कुछेक का पूरे होने का इंतज़ार करते-करते किसानों की आत्महत्यों के मामले और भी बढ़ गए हैं

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और आज आलम यह है कि महाराष्ट्र सूखे से जूझ रहा है। खेती और किसान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों में आम तौर पर शामिल होते हैं। सत्ता में आने के तकरीबन ढाई महीने बाद उन्होंने इं‌डियन काउंसिल ऑफ एग्रिकल्चर रिसर्च के एक प्रोग्राम में किसानों को ‘हर बूंद पर ज्यादा फसल’ उगाने का मंत्र दिया था। राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक, उसी साल 5,650 किसानों ने आत्महत्या की थी। जब से मोदी सत्ता में आए हैं सिर्फ विदेशी दौरे और विदेशी बिज़नेस के बारे में बाते करते नजर आते हैं। किसानों की हालत बद से बदतर हो गई है। मराठवाड़ा और बुंदेलखंड से आ रही सूखे की आहट से किसान और सहमे हैं। सवाल उठने लगा है कि उन वादों और इरादों का क्या हुआ, जिनका यकीन बीजेपी ने लोकसभा चुनावों के लिए जारी किए गए अपने घोषणा पत्र में दिलाया था। उस वक़्त किसानों के लिए पार्टी ने जो घोषणाएं की थी, उनमें से कितनों पर अमल हुआ। कहां रह गए किसानों के अच्छे दिन?

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