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मोदी सरकार ने सेना की जेब पर की सर्जिकल स्ट्राइक, पेंशन में की भारी कटौती

नई दिल्ली: उरी हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक्स की शेखी बघेर राजनीतिनिक माइलेज बटोरने वाली बीजेपी सरकार असल में देश के जवानों का कितना सम्मान करती है वो सरकार के एक फैसले ने साफ़ कर दिया है।

बात 30 सितम्बर की है, उधर पूरे देश में भारतीय सेना द्वारा पीओके में की गई सर्जिकल स्ट्राइक्स को लेकर मीडिया में छायी हुई थी, यहाँ तक कि केंद्र सरकार भी सेना की इस शौर्यपूर्ण काम का क्रेडिट खुद को देने में लगी हुई थी लेकिन अंदर ही अंदर सरकार सेना के जवानों की जेब पर कैंची चलाने की तैयारी भी कर चुकी थी।

सेना से जुड़े सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्रालय ने सेना को एक सूचनापत्र जारी कर बताया है कि मंत्रालय ने देश की सरहद पर तैनात जवानों से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक्स करने वाले स्पेशल फाॅर्स के जवानों तक हर किसी की अपंगता पेंशन पर कैंची चलाने का फैसला किया है। गौरतलब है की ड्यूटी के दौरान देश के जवान कई तरह के मुश्किल हालातों का सामना करते हुए सीमा की रक्षा करते हैं। इस तरह के काम में गोली आदि लगने से शरीर के अंगों के नाकारा होने का, बर्फीले इलाके में ठण्ड की वजह से फ्रॉस्ट बाइट होने जैसी चीज़ों का खतरा बना रहता है।

ऐसे में कई मामलों में अपंगता का शिकार हुए जवानों के लिए कई मामलों में नौकरी करना असंभव हो जाता है ऐसे में उसका एक मात्रा कमाई का साधन उसकी पेंशन ही रह जाती है जिसमें सरकार ने भारी कटौती कर सेना के मनोबल को तोड़ने की कोशिश की है।

मिसाल के तौर पर सेना में पांच साल का कार्यकाल पूरा कर चुके एक जवान जिसकी तनख्वाह करीब 30,400 होती है की अब पूर्ण अपंगता की हालत में पेंशन 12000 रूपये रह जायेगी। जबकि पहले ऐसे मामलों में चोटिल या अपंग होने के वक़्त मिलने वाली तनख्वाह के जितनी रखम ही बतौर पेंशन लिए जाने का प्रावधान था।

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