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मोदी सरकार में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला, BSNL की डील में 300 करोड़ का नुकसान

नई दिल्ली :  देश की सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल और अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनी सिस्को के बीच हुई एक डील में सरकार को 300 करोड़ का नुकसान हुआ है | ये बड़ा घोटाला विकास के दावे के साथ “बहुत हुआ भ्रष्टाचार, अबकी बार मोदी सरकार” के नारे वाली सरकार में हुआ है |

“द क्विंट” की खबर के मुताबिक डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्यूनिकेशन,प्रधानमंत्री कार्यालय, सेंट्रल विजिलेंस को इसकी जानकारी मिल जाने के बाद भी सरकार ने इसकी जाँच का कोई आदेश नहीं दिया है | जबकि सिस्को के डायरेक्टर स्टीव विलियम्स विभागीय स्तर पर जांच कर रहे हैं|

नेशनल इंटरनेट बैकबोन (एनआईबी) के बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए BSNL और अमेरिकी की मल्टीनेशनल कंपनी सिस्को के दरम्यान एक समझौता हुआ था | जिसके तहत उपकरणों की खरीद में देश के खजाने को करीब 300 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है | अभी तक इस मामले की जांच का कोई आदेश सरकार की तरफ से नहीं आया है| लेकिन इस घोटाले की विभागीय जांच शुरु हो गई है|

वर्ष 2015 में एनआईबी इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने के लिए बीएसएनएल ने प्रेस्टो इंफोसॉल्यूशन कंपनी को 95 करोड़ रुपए का ऑर्डर दिया था। राउटर्स की सप्लाई के लिए ये ऑर्डर प्रेस्टो इंफोसॉल्यूशन को दिया गया था। पिछले पांच वर्षों से एचसीएल राउटर्स की सप्लाई कर रहा है। यह पूरा टेंडर ही विवादों में घिर हुआ है | किसी भी ऑर्डर की सप्लाई के लिए सीवीसी के दिशा-निर्देशों के मुताबिक टेंडर बुलाया जाना चाहिए है। लेकिन बीएसएनएल ने प्रेस्टो इंफोसॉल्यूशन को ऑर्डर देते वक्त उसकी आर्थिक स्थितियों को ध्यान नहीं दिया साथ ही प्राइस वेलिडेशन एक्सरसाइज भी नहीं किया गया।

प्रेस्टो इंफोसॉल्यूशन ने BSNL से ऑर्डर मिलने के बाद सिंगापुर की एक कंपनी इनग्राम माइक्रो को 50 करोड़ का ऑर्डर दिया था| ऐसा आरोप है कि इन उपकरणों को इंस्टॉल करने की क्षमता नहीं होने के बावुजूद प्रेस्टो कंपनी ने इस ऑर्डर में सीधे तौर पर 45 करोड़ का मुनाफा कमाया है| इनग्राम माइक्रो और सिस्को की इनवॉइस के मुताबिक इस ऑर्डर में सीमा शुल्क और टैक्स भी बचाए गए हैं।

ये भी आरोप है कि प्रेस्टो इंफोसॉल्यूशन ने ज्यादा कीमत देकर आउट डेटेड उपकरण खरीदे हैं। जबकि मंगाए गए 35 फीसदी उपकरण का इस्तेमाल भी नहीं किया गया। बताया जा रहा है कि इन उपकरणों की लाइफ खत्म होने के बाद भी सिस्को ने बीएसएनएल को ये बेचे थे। इसके अलावा एक दूसरे मामले में करीब 200 करोड़ का घोटाला सामने आया है जिसमें रखरखाव और अतिरिक्त हार्डवेयर खरीदने के लिए BSNL ने 200 करोड़ रुपए की डील की थी।

 

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