Thursday , August 24 2017
Home / Delhi / Mumbai / मोदी सरकार, मेक इन इंडिया के नाम पर भारत को नष्ट कर रही है

मोदी सरकार, मेक इन इंडिया के नाम पर भारत को नष्ट कर रही है

नई दिल्ली: भारत के विकास के बजाय मोदी सरकार इस देश को तोड़फोड़ की भेंट कर रही है। विभिन्न क्षेत्रों में सदनिसद एफडीआई सुधार के नाम पर भारत को नष्ट किया जा रहा है। एफडीआई मसले पर आज विभिन्न नेताओं ने सरकार को आलोचना का निशाना बनाया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में एफडीआई को 100 प्रतिशत देना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।

सोमवार को भारत में लगभग क्षेत्रों में बाहरी निवेशकों को 100 फीसदी निवेश की अनुमति दी गई है। सरकार तेजी से रूबा अमल लाई जाने वाली फ़्राखदलाना नीतियों के परिणाम में बहुत कुछ नुकसान होने वाले हैं। तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि एफडीआई सुधार का रोजगार, अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा और भारतीय मार्किट भी प्रभावित होगी।

मेक इन इंडिया के नाम पर ब्रेकिंग इंडिया (भारत को तोड़ देने) का काम हो रहा है। एस जे एम नेता अश्विनी महाजन ने कहा कि संसाधनों के सिद्धांत को नरम बनाने की नीति बेहतर है और यह अंतर्देशीय आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा करेगी। कांग्रेस के एक और नेता आनंद शर्मा ने कहा कि यूपीए सरकार द्वितीय के समय में एफडीआई 49 प्रतिशत की अनुमति दी जा चुकी है।

सीसीएस ने 49 प्रतिशत से अधिक एफडीआई की अनुमति दी थी और यही भारत की कंपनियों के लिए सुरक्षित प्रक्रिया थी लेकिन सरकार ने इसमें सुधार लाकर 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति देने से आर्थिक अब्तरी की आशंका है। सरकार ने खाद्य वस्तुओं में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी है।

इस विभाग के तहत व्यापार मार्गों का विस्तार देना और ई-कॉमर्स के जरिए खाद्य वस्तुओं को भारतीय मार्केट में फैला है। दवा क्षेत्र में भी सरकार ने 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी है। सरकारी फार्मा में 74 प्रतिशत एफडीआई होगी। नागरिक उड्डयन में भी एफडीआई का विस्तार देकर स्वचालित मार्गों के तहत 100 प्रतिशत एफडीआई की राह हमवारकी गई है।

इसके तहत ईरपोर्टस निर्माण और मौजूदा ईरपोर्टस पुनर्निर्माण के काम भी अंजाम दिए जाएंगे। रक्षा क्षेत्र में 49 प्रतिशत एफडीआई दी जा रही है। अब सरकार ने इससे अधिक की मंजूरी दी है। इसके तहत समकालीन प्रौद्योगिकी की मदद से हथियार तैयार किए जाएंगे। एफडीआई की अनुमति से भारत में वित्तीय वर्ष 2015-16य के दौरान पर सबसे 55.46 अरब डॉलर का निवेश होता है। पूर्व रक्षा मंत्री एंटनी ने रक्षा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई का विरोध किया है और चेतावनी दी है कि इस देश की स्वतंत्र विदेश नीति से समझौता करना होगा।

सरकार पर आरोप लगाते हुए कि वह अमेरिका के दबाव में आकर काम कर रही है। एंटनी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हाल दौरा अमेरिका और एफडीआई में तेजी से परिवर्तन का प्रत्यक्ष संबंध है। ओबामा और मोदी का संयुक्त बयान कि खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाएगा तो इस तरह के बयान में कोई संतुलन नहीं दिख रहा।

TOPPOPULARRECENT