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मोदी हुकूमत को सुप्रीम कोर्ट से एक और फटकार

मोदी हुकूमत पर एक और फटकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 2002 से 2006 -ए-के दौरान गुजरात में हुए 22 एनकाउंटर्स हलाकतों की तहक़ीक़ात के लिए एक नगर इनकार अथॉरीटी की हैसियत से नए चेयरमैन का तक़र्रुर करने से मुताल्लिक़ इससे मुशावरत ना करने का सवाल

मोदी हुकूमत पर एक और फटकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 2002 से 2006 -ए-के दौरान गुजरात में हुए 22 एनकाउंटर्स हलाकतों की तहक़ीक़ात के लिए एक नगर इनकार अथॉरीटी की हैसियत से नए चेयरमैन का तक़र्रुर करने से मुताल्लिक़ इससे मुशावरत ना करने का सवाल उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने साबिक़ सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस एम बी शाह के बजाय मुंबई हाइकोर्ट के साबिक़ चीफ़ जस्टिस के आर व्यास के तक़र्रुर पर अपनी नाराज़गी का इज़हार किया है।

एम बी शाह ने ज़ाती और सेहत की बुनियादों पर पैनल की क़ियादत से इस्तीफ़ा दे दिया था। जस्टिस आफ़ताब आलम और रंजना प्रकाश देसाई पर मुश्तमिल बंच ने कहा कि हमें नये चेयरमैन के तक़र्रुर के लिए तजवीज़ से मुताल्लिक़ भी इत्तिला दी जानी चाहीए थी।

सीनीयर एडवोकेट रणजीत कुमार और गुजरात के एडवोकेट जनरल तुषार महित ने बंच को बताया कि साबिक़ चेयरमैन महाराष्ट्रा इंसानी हुक़ूक़ कमीशन जस्टिस वयास के तक़र्रुर के लिए कल ही आलामीया जारी किया गया है क्योंकि जस्टिस शाह चेयरमैन की हैसियत से बरक़रार रहने से इंकार किया है।

सुप्रीम कोर्ट के अहकाम मौरर्ख़ा 25 जनवरी के मुताबिक़ नगर इनकार पैनल को वक़्त मुक़र्ररा के अंदर अपनी उबूरी रिपोर्ट दाख़िल करनी है। ताहम बंच ने कहा कि इस तक़र्रुर को अदालत से मुशावरत के ज़रीया ही पूरा किया जाना चाहीए था क्योंकि अदालत ने ही
अहकाम जारी किए थे।

आप (हुकूमत गुजरात) ने इस मुआमले को गै़रज़रूरी पेचीदा बनाया है। आप को चाहीए था कि आप हमसे रुजू होते। इस ताल्लुक़ से आप को इंतेज़ार करनी चाहीए था। क्योंकि ये मुआमला हमारे अहकाम से मुताल्लिक़ है इसके हक़ायक़ से हमें इत्तेला देना ज़रूरी है। अदालत का ख़्याल था कि हुकूमत गुजरात के वकील को इस मुआमला का इल्म पीर ( सोमवार) को ही हुआ था लेकिन इसको आज हमारे सामने लाया गया है। हुकूमत गुजरात को ये बात अदालत के सामने पेश करनी चाहीए थी कि इसने जस्टिस व्यास का तक़र्रुर अमल में लाया है।

सुप्रीम कोर्ट के बंच में बुज़ुर्ग सहाफ़ी बी जी वरघसे और शायर-ओ-नग़मा निगार जावेद अख्तर की जानिब से दाख़िल कर्दा 2 मफ़ाद-ए-आम्मा की दरख़ास्तों पर समाअत हो रही है। इन दोनों शख़्सियतों ने एक आज़ाद एजेंसी या सी बी आई के ज़रीया इस वाक़्या की तहक़ीक़ात के लिए हिदायत देने की इस्तेदा की है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

बंच ने 25 जनवरी को नगर इनकार अथॉरीटीज़ से कहा था कि वो 2002 और 2006 के दरमयान गुजरात में मुबय्यना फ़र्ज़ी एनकाउंटरस में होने वाली हलाकतों पर इबतिदाई रिपोर्ट तीन माह के अंदर पेश कर दे। मुस्लमानों को दहश्तगर्द क़रार देते हुए उन्हें निशाना बनाते हुए किए गए एनकाउंटर पर सुप्रीम कोर्ट ने तहक़ीक़ात का हुक्म दिया था।

हुकूमत गुजरात ने 7 अप्रैल और 18 सितंबर 2010 को एस टी एफ़ की तश्कील के लिए आलामीया जारी किया था ताकि एनकाउंटर हलाकतों की तहक़ीक़ात की जा सके। इस वक़्त चेयरमैन की हैसियत से जस्टिस रिटायर्ड एम वी शाह का तक़र्रुर अमल में लाया था।

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