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मोहन भागवत जैसे लोग अंग्रेजों से भी खतरनाक : लालू

पटना : राष्ट्रीय जनता दल के सरबराह लालू प्रसाद एतमाद से लबरेज हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जातिवादी कौन है, यह सब जानते हैं। रिज़र्वेशन को वह इंतिख़ाब का अहम मुद्दा करार देते हैं। हमारा इत्तिहाद बहुत आगे निकल गया है। भाजपा दरहम बरहम हो गयी है। उनके यहां टिकट को लेकर मारामारी है। पूरे समाज में मैसेज गया है कि भाजपा एंटी दलित है, एंटी बैकवर्ड है। मोहन भागवत ने सब बेनकाब कर दिया है। मोहन भागवत ही भाजपा के माई-बाप हैं।

उनका हिडेन एजेंडा हैं। लोग उनके बहकावे में नहीं आने वाले। ये लोग भारत का टुकड़ा-टुकड़ा करना चाहते हैं। हमारे पिलर को भाजपा और एनडीए डोला नहीं सकता। गांवों में कहावत है -चक डोले, चकदम्बा डोले, खैरा पीपल कभी न डोले। हम पीपल हैं, ऐसी हवाओं से झुकने वाले नहीं हैं। इंतिख़ाब तो लालू प्रसाद और नरेंद्र मोदी के दरमियान में है। बाकी सब पानी में हैं।

परिवारवाद के बाने में उन्होने कहा बेटा है तो कहां जायेगा। सियासत में ही जायेगा। दोनों बेटा मेहनत कर रहा है। गुजिशता आम इंतिख़ाब में भी पार्टी का काम किया था। मुसलसल नौजवानों के दरमियान जा रहा है। हमारा बेटा आगे बढ़ रहा, तो किसी का पेट क्यों गड़ रहा है?

हमने आदमखोर कहा है अमित शाह को। भाजपा बताये कि अमित शाह पर किस दफा में केस दर्ज हुआ था। वहां तो लालू यादव और नीतीश कुमार की हुकूमत नहीं थी। किसकी सरकार थी और फिर भी सोहराबुद्दीन के फरजी मुठभेड़ का केस था, तड़ीपार हुए थे। और.. यहां आकर हमको गाली दे रहे हैं।

अरुण जेटली ने कह दिया कि अमित शाह को फंसाने के लिए हमने जांच बिठा दी थी। साबरमती एक्सप्रेस को लेकर हमने रेल वज़ीर के तौर पर बनर्जी कमीशन तशकील किया था, ऐसी वारदात की वजह और तशख़ीस खोजने के लिए।

भाजपा के टारगेट में है यादव समाज। इसलिए कुछ को उम्मीदवार भी बनाया है। लेकिन, इससे क्या होगा। यादव, पसमानदा, दलित, गरीब-गुरबा सब का सब हमारा वोटर है। सारे वोटर लालू को समझते हैं। अवाम जान रही है। यादव समझ रहे हैं। एक भी यादव का वोट कहीं दूसरे जगह नहीं जाने वाला है। चाहे यादव हों या दूसरे पासमानदा वोटर, सारे अजीम इत्तिहाद को अपना वोट करेंगे। उन्हें मालूम है कि भाजपा सिर्फ उनका इस्तेमाल करना चाहती है। आप (भाजपा) कितना भी पसीना बहा लो, कितना भी करतब कर लो, लेकिन वोट तो वहीं गिरेगा, जिसके हाथ में लालटेन, तीर और हाथ है।

आरएसएस जातिवादी ही नहीं बल्कि हिंदू मुखालिफत तंजीम भी है। अगर ये हिंदुओं के सच्चे खैरख़्वाह होते तो 90 फीसद पसमानदा, दलित, महरूम, गरीब और दुखी हिंदुओं के कानून से मिले रिज़र्वेशन को खत्म करने की बात नहीं करते। मोहन भागवत जैसे लोग अंग्रेजों से भी खतरनाक हैं।

लोग सजग हो रहे हैं। हम अवाम के दरमियाना जा रहे हैं। लोगों को बता रहे हैं। मरकज़ में गरीब की हुकूमत नहीं है। हम कहते हैं तबदीली होगा, लेकिन दिल्ली में तब्दील होगा। बिहार हम लोग जीतेंगे, तो बीचे में दिल्ली की गद्दी हिल जायेगी और वहां हुकूमत तब्दील हो जायेगा।

ओवैसी के बारे में कहा की ओवैसी कोई फैक्टर नहीं है। हमारे पीछे भाजपा ने तीन यादव छोड़ रखे हैं। इनमें से नंद किशोर का पत्ता संतोष मेहता को खड़ा करके साफ कर दिया। पप्पू आज जहाज पर घूम रहा है। पहले हमारे आगे-पीछे घूमता था, जहाज पर घूमने लगा और समझने लगा कि ऊ लीडर हो गया। जहाज पर घूमने से कोई लीडर नहीं होता। तीसरे हैं राम कृपाल, जिनकी भाजपा में जो हैसियत है, वह सब जानते हैं। स्टेशन पर खड़ा रहता था, आज बड़ा आदमी बन रहा है।

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