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मौलाना आजाद ने आख़िरी सांस तक देश के विभाजन का किया विरोध

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अलीगढ़: विशेषज्ञों ने मंगल के रोज़ कहा कि भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने अपनी अंतिम सांस तक देश के विभाजन का विरोध किया था ।

मंगल के रोज़ मौलाना आजाद की बरसी पर उनकी याद में आयोजित एक समारोह में जामिया उर्दू अलीगढ़ में विशेष कार्य अधिकारी फरहत अली खान ने कहा “मौलाना अबुल कलाम आजाद न केवल एक महान लेखक, विचारक, स्वतंत्रता सेनानी और स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे बल्कि वह सेक्युलरिज्म की जिंदा मिसाल भी थे”|

उन्होंने कहा मौलाना आजाद हमेशा धर्म और राजनीति पर देशभक्ति को प्राथमिकता देकर नया कीर्तिमान स्थापित किया था |

जामिया उर्दू अलीगढ़ के रजिस्ट्रार शमून रज़ा नक़वी ने कहा कि मौलाना आजाद “एक स्वतंत्र विचारक थे और उन्होंने हमारे एजुकेशन सिस्टम की नींव रखी थी | मौलाना आजाद द्वारा सबसे खास सुधार की पहल छात्रों के लिए थ्री लेन्गुऐज फार्मूला थी |

जासिम मौहम्मद ने कहा कि मौलाना की ज़िन्दगी और काम को सिर्फ उनके बहुमुखी प्रतिभा के तौर पर नहीं जाना जा सकता बल्कि वह एक महान शख्सियत थे जिन्होंने देश की एकता के लिए अपनी ज़िन्दगी की आख़िरी सांस तक संघर्ष किया |

रिजवान अली खान ने कहा, “मौलाना आजाद जैसे लोगों सदियों में जन्म लेते हैं”, और आज की पीढ़ी को “अपने मुस्तकबिल को रोशन बनाने के लिए” उनके जीवन और कार्यों से प्रेरणा लेना चाहिए।

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