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मौलाना नसीर उद्दीन के फ़रज़न्दों को दुबारा हिरासत में लेने की कोशिश बद बख्ता ना

मौलाना मुहम्मद नसीर उद्दीन के दो फ़र्रज़िंदाँ (लडके)मुहम्मद मुक़ीम उद्दीन यासिर और मुहम्मद बलीग़ उद्दीन जाबिर की इंदौर जेल से रिहाई के साथ ही हैदराबादी पोलीस की उन्हें दुबारा हिरासत में लेने की कोशिशों को बद बख्ता(बुर‌)ना क़रार देते

मौलाना मुहम्मद नसीर उद्दीन के दो फ़र्रज़िंदाँ (लडके)मुहम्मद मुक़ीम उद्दीन यासिर और मुहम्मद बलीग़ उद्दीन जाबिर की इंदौर जेल से रिहाई के साथ ही हैदराबादी पोलीस की उन्हें दुबारा हिरासत में लेने की कोशिशों को बद बख्ता(बुर‌)ना क़रार देते हुए जनाब ज़ाहिद अली ख़ान एडीटर सियासत-ओ-रुकन पोलेट ब्यूरो तेलगो देशम ने सख़्त मज़म्मत (निंदा)करते हुए कहा के दोनों नौजवानों की ज़मानत मंसूख़ करवाते हुए उन्हें दुबारा हिरासत में लेने इस्पैशल इनव‌सटी गैशन टीम के अदालत से रुजू होने से ये साफ़ ज़ाहिर होता है के वो इस ख़ानदान के अफ़राद ख़ानदान पर अपने मज़ालिम का ना कतम होने वाला सिलसिला जारी रखना चाहती है और ये समझती है के मौलाना नसीर उद्दीन और उन के अरकान ख़ानदान के ख़िलाफ़ उस की हर कार्रवाई पर रोक लगाने वाला कोई नहीं है और मुस्लमान भी ये बावर(भरोसा)करलेंगे के वो किसी ना किसी लिहाज़ से दहश्त गिरदाना कार्यवाईयों में मुलव्वस(मिले) हैं।

जनाब ज़ाहिद अली ख़ान ने कहा के जहां तक उन्हें इलम है हाल ही में इंदौर जेल से रहा शूदा यासिर और जाबर के ख़िलाफ़ तीन मुक़द्दमात दर्ज हैं और उन सब में पेशगी ज़मानत हासिल करली गई है। उन्हों ने कहा के जहां तक केस नंबर 882/2004 का ताल्लुक़ है इस में मौलाना नसीर उद्दीन की गुजरात पोलीस के हाथों गिरफ़्तारी और मुजाहिद सलीम की शहादत के दौरान मुज़ाहरा करने वालों के ख़िलाफ़ पोलीस ने एक मुक़द्दमा दर्ज किया गया था।

जनाब ज़ाहिद अली ख़ान ने कहा के इसी वाक़िया के सिलसिला में हमारी पोलीस ने गुजरात पोलीस के ओहदेदारों के ख़िलाफ़ क़तल का एक मुक़द्दमा दर्ज किया था मगर आज तक इन ख़ातियों को गिरफ़्तार करने में किसी किस्म की संजीदगी का मुज़ाहरा नहीं किया गया जबके उस वक़्त के चीफ मिनिस्टर डाक्टर वाई एस राज शेखर रेड्डी ने इस मुक़द्दमा में किसी को भी गिरफ़्तार ना करने का तीक़न दिया था।

इसी तरह मक्का मस्जिद बम धमाका के बाद मुस्लिम नौजवानों को इस में माख़ूज़(शामिल)करने के लिए एक फ़र्ज़ी मुक़द्दमा 198/2007 दर्ज किया गया था जिस में इन दोनों नौजवानों के ख़िलाफ़ कोई चार्ज शीट दाख़िल नहीं की गई और माबक़ी 21 अहम मुलज़मीन(ज़ुल्म करने वाला) को अदालत की जानिब से बरी कर दिया गया था और क़ौमी इकलेती कमीशन की सिफ़ारिशात पर रियासती हुकूमत ने मुआवज़ा अदा करने के साथ तमाम के लिए सदाक़त नामा शराफ़त से सरफ़राज़ किया था।

इसी तरह केस नंबर 213/2008 भी एक फ़र्ज़ी साज़िशी मुक़द्दमा है जिस में ताहाल कोई गिरफ़्तारी अमल में नहीं आई । ये मुक़द्दमा महिज़ इसी लिए दर्ज किया गया था के इन नौजवानों की रिहाई की सूरत में उन्हें दुबारा असीर(बुलंद) बना दिया जाय।

जनाब ज़ाहिद अली ख़ान ने कहा के इस्पैशल इनव‌सटी गैशन टीम को चाहीए के वो एक ख़ानदान के ख़िलाफ़ यकतरफ़ा कार्रवाई करते हुए अपनी नेकनामी को मुतास्सिर ना करे। जनाब ज़ाहिद अली ख़ान ने कहा के म्यों तो शहर में फ़िर्कावाराना मुनाफ़िरत फैलाने के सिलसिला में हमारी पोलीस यकतरफ़ा कार्रवाई करती है और शाज़-ओ-नादिर( बराबर) कभी किसी के ख़िलाफ़ केस दर्ज करलिया भी जाता है तो उन के ख़िलाफ़ किसी किस्म की कार्रवाई करने से माज़ूर (नकम)रहती है इस से पोलीस की फ़िर्कापरस्ती खुल कर सामने आजाती है।

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