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मौलाना ज़ुबैर उल-हसन कानधलवी का इंतेक़ाल

मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद इर्फ़ान क़ासिमी उस्ताज़ मुदर्रिसा तजवीद उल-क़ुरआन के बमूजब ये ख़बर इंतिहाई रंज-ओ-अफ़सोस के साथ पढ़ी जाएगी कि दावत-ओ-तब्लीग़ के इंतिहाई अहम तरीन ज़िम्मेदार मुमताज़ और बुज़ुर्ग आलमे दीन हज़रत मौलाना ज़ुबैर उल-हसन कान

मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद इर्फ़ान क़ासिमी उस्ताज़ मुदर्रिसा तजवीद उल-क़ुरआन के बमूजब ये ख़बर इंतिहाई रंज-ओ-अफ़सोस के साथ पढ़ी जाएगी कि दावत-ओ-तब्लीग़ के इंतिहाई अहम तरीन ज़िम्मेदार मुमताज़ और बुज़ुर्ग आलमे दीन हज़रत मौलाना ज़ुबैर उल-हसन कानधलवी का इंतेक़ाल होगया है।

मौलाना मरहूम तब्लीग़ी जमात के तीसरे हज़रत जी हज़रत मौलाना इनाम उल-हसन कानधलवी के फ़र्ज़ंद थे। 30 मार्च 1950 को आप की पैदाइश हुई।

मुत्तहदा हिंदुस्तान की बुज़ुर्ग शख़्सियत हज़रत मौलाना अबदुलक़ादिर राइपोरी के यहां मौलाना कानधलवी की इबतिदाई तालीम का आग़ाज़ हुआ। 6 फेबव‌री 1969 में आला दीनी तालीम के लिए आप ने मुल्क की क़दीम और माया नाज़ दीनी दरसगाह जामिआ मज़ाहिर उल-उलूम सहार नुपूर में दाख़िला लिया और 1990 में दौरा-ए-हदीस की तकमील की।

15 जनवरी 1969 में मशहूर-ए-ज़माना बुज़ुर्ग, माया नाज़ मुहद्दिस हज़रत मौलाना ज़करीया कानधलवी उल-मारूफ़ शेख़ उलहदीस मुसन्निफ़ फ़ज़ाइल आमाल की नवासीहकीम मुहम्मद इलयास की दुख़तर से आप का निकाह हुआ। फिर 1978 में हज़रत-ए-शैख़ उलहदीस मौलाना ज़करीया कानधलवी ने मुक़द्दस शहर मदीना मुनव्वरा में आप को ख़िलाफ़त से नवाज़ा।मौलाना ज़ुबैर उल-हसन कानधलवी अपने वालिद मुहतरम हज़रत जी इनाम उल-हसन कानधलवी के ज़माना ही से दावत-ओ-तब्लीग़ के अहम ज़िम्मेदारीयों को अंजाम देते थे। पसमानदगान में 3 फ़र्ज़ंदान और 3 दुख़तरान शामिल हैं।

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