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म्यांमार तशद्दुद से जुड़े हैं महाबोधि धमाके के तार

नई दिल्ली, 7 जुलाई: बिहार के बोधगया वाकेए महाबोधि मंदिर में आज तड़के हुए सीरियल ब्लास्ट के वाकिया के तार म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ तशद्दुद से जुड़ते दिख रहे हैं।

नई दिल्ली, 7 जुलाई: बिहार के बोधगया वाकेए महाबोधि मंदिर में आज तड़के हुए सीरियल ब्लास्ट के वाकिया के तार म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ तशद्दुद से जुड़ते दिख रहे हैं।

वज़ारत ए दाखिला का मानना है कि इस तशद्दुद का बदला लेने के लिए दहशतगर्द तंज़ीम इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) ने इन धमाकों को अंजाम दिया।

इसके लिए खतरनाक दहशतगर्द तंज़ीम अलकायदा ने अपने साथी दहशतगर्द तंज़ीम जमात अल तवाहिद वल जिहाद के जरिए आईएम की मदद की।

बौद्ध मंदिरों और तिब्बत से जुड़े इलाकों में दहशतगर्दी कार्रवाई की खुफिया इत्तेला के मद्देनजर वज़ीर ए दाखिला ने इस वाकिया के बाद सभी रियासतों को एडवाइजरी जारी कर ऐसी जगहों की हिफाज़त बढ़ाने की हिदायत दी है।

महाबोधि मंदिर पर हमले की आशंका पहले से थी। इस संबंध में वज़ारत ए दाखिला के साथ-साथ कौमी जांच एजेंसी (एनआईए), आईबी के साथ-साथ दिल्ली पुलिस ने भी बिहार हुकूमत को अलर्ट भेजा था। इसके बावजूद घटी इस् दहशतगर्द वाकिया से नाराज वज़ारत ए दाखिला ने हुकूमत बिहार से जवाब तलब किया है।

वज़ारत ए दाखिला के ज़राए के मुताबिक गुजशता साल अक्टूबर के महीने में पुणे धमाकों से जुड़े आईएम के दहशतगर्द सैयद मकबूल से पूछताछ में बौद्ध मुकामात पर हमले की साजिश का पता चला था।

एनआईए की पूछताछ में मकबूल ने महाबोधि मंदिर की रेकी करने की बात कबूल की थी। उसने बताया था कि आईएम का बीज बोने वाले भटकल भाइयों इकबाल भटकल और यासीन भटकल ने म्यांमार में बौद्ध भिक्षुओं की तरफ से रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ की गई तशद्दुद का बदला लेने की तैयारी कर ली है।

इनके मंसूबे बौद्ध मुकामात पर खुदकश हमले कराने की है। इसके इलावा आईबी और दिल्ली पुलिस की आईएम के कुछ गिरफ्तार दहशतगर्दों से पूछताछ में भी इस साजिश का खुलासा हुआ था।

वज़ारत के ज़राए का कहना है कि तीनों एजेंसियों के इलावा खुद वज़ारत ए दाखिला ने महाबोधि मंदिर पर हमले के तरफ से हुकूमत बिहार को अलर्ट किया था। आईबी ने तो बीते हफ्ते ही अलर्ट भेजा था। इसके मद्देनजर मंदिर के खास पुजारी ने बिहार हुकूमत से हथियार की भी मांग की थी।

ज़राए का कहना है कि महाबोधि मंदिर में सुबह की पूजा काफी अहम होती है। खासतौर पर इतवार के दिन इसी वक्त खास पूजा होती है।

इस दौरान बैरून से आने वाले बौद्ध भिक्षु खासतौर पर हिस्सा लेते हैं, इसलिए धमाके का वक्त बहुत सोच समझ कर सुबह का ही तय किया गया।

हालांकि बम रखने वाले सही जगह की पहचान नहीं कर पाए और सभी बम कम ताकत वाले थे, इसलिए नौ धमाकों के बावजूद महज कुछ ही लोग ज़ख्मी हुए।

वाजेह है कि बीते कुछ सालों से बिहार के दो जिले दरभंगा और मधुबनी आईएम का गढ़ बनते जा रहे हैं। इन्हीं दो जिलों से कई दहशतगर्द तंज़ीमो से जुड़े लोगों की गिरफ्तारियों के बाद इस बात का खुलासा हुआ था।

वज़ारत के ज़राए का कहना है कि इस धमाके के बाद जांच एवं खुफिया एजेंसियों की खास निगाह इन दो जिलों पर है।

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