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यहां जमीन से निकलती है आग

पैरों की नीचे दहकते शोले और हवा में जहर के दरमियान जी रही हैं लाखों जिंदगियां। 1916 में जब पहली बार यहां की ज़मीन ने आग उगली थी, वो सिलसिला अभी तक जारी है।

पैरों की नीचे दहकते शोले और हवा में जहर के दरमियान जी रही हैं लाखों जिंदगियां। 1916 में जब पहली बार यहां की ज़मीन ने आग उगली थी, वो सिलसिला अभी तक जारी है।

इस आग को बुझाने के लिए क़ौमी सतह पर जब बात नहीं बनी तो अमेरिका और कनाडा की मदद भी ली गई, लेकिन ये सारी कोशिशें नाकामयाब हुईं। दोनों मुल्कों ने इस मसले के आगे हार मान ली। भारत में सबसे ज्यादा कोयला पैदावार करने के लिए मशहूर यह शहर इसी वजह के चलते आज अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा है।

तकरीबन 70 किमी एरिया में जमीन के नीचे आग सुलग रही है। झारिया का इलाका धनबाद से तकरीबन 20 किमी की दूरी पर वाक़ेय है। इस इलाके में कभी बड़ी तादाद में कोयले की खदानें हुआ करती थीं। लेकिन जमीन के नीचे लगी आग की वजह से ये खदानें धीरे-धीरे बंद होती गईं।

जमीन के नीचे मुसलसल आग सुलगती रहने की वजह से झरिया एक टापू की तरह हो गया है। जिसके चारों तरफ जमीन के नीचे सिर्फ राख ही बची है। इस वजह यह शहर कभी भी जमीन में धंस सकता है। यहां रह रहे लोगों की जिंदगी की कोई गारंटी नहीं है।

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