Wednesday , September 20 2017
Home / Bihar/Jharkhand / यहां मरने के बाद दफना दिए जाते हैं हिन्दू भी

यहां मरने के बाद दफना दिए जाते हैं हिन्दू भी

लखीसराय : गरीबी की मार किस तरह अपनी कल्चर तक को मुतासिर कर देती है, इसकी मिसाल लखीसराय जिले के पीरी बाजार इलाके में देखने को मिल रहा है। यहां पहाड़ों व जंगलों से घिरे आदिवासी समाज के लोगों की दाह-संस्कार की परंपरा बदलती चली जा रही है। एक अन्य समुदाय की तरह यहां हिन्दू भी मरने के बाद जमीन में दफना दिए जाते हैं। सुन कर यकीन न हो, लेकिन यह सच्चाई है।

लाश को दफनाने के चलन के पीछे किसी तरह का दबाव या अंधविश्वास नहीं है, बल्कि गरीबी के वजह से यहां का आदिवासी समुदाय दाह-संस्कार का खर्च वहन नहीं कर पाता और मरने के बाद परिजनों के शव को मिट्टी में ही दफना दे रहा है।

पीरी बाजार व कजरा क्षेत्र के नक्सल मुतासिर इलाके टाली कोड़ासी, लठिया कोड़ासी, बरियासन, सुअरकोल, जमुनिया, मनियारा आदि गांवों में गरीबी और जिल्लत के मारे इन आदिवासी लोगों की यह मजबूरी हो चुकी है। यहां के करीब 20 फीसद आदिवासियों की यह चलन पिछले कई सालों से अपनाया जा रहा है। ये लोग परिजनों के मरने के बाद लश को जलाते नहीं, बल्कि गांव के पास पहाड़ी जंगल में गड्ढा खोद कर मिट्टी डाल देते हैं और फिर पत्थर के नीचे दबा कर दफना देते हैं।

पीरी बाजार थाना इलाके के टाली विशनपुर गांव के कारू बेसरा, बबलु बेसरा ने बताया कि जब से होश संभाला है तब से ही गांव के गरीब परिवार के लोगों को पहाड़ एवं खेते में ही शव को दफन करते देखते चले आ रहे हैं। बुजुर्ग बताते हैं कि हिन्दु कुल में जन्म लेने के बावजूद दाह-संस्कार की परंपरा नहीं अपना सकते। उन्होंने बताया कि शव को दफन कर उनकी याद में वहां पत्थर लगा दिया जाता है और दूसरा कारण शव को जानवरों से सुरक्षित रखना भी है।

TOPPOPULARRECENT