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यादव परिवार भी अखिलेश के साथ, मुलायम पड़े अकेले

फैसल फरीद: लखनऊ: समाजवादी पार्टी के ड्रामे के बीच अब यादव परिवार की कलह भी खुल कर सामने आ रही हैं. शायद भारत के सबसे बडे राजनितिक परिवार जिसके २१ सदस्य सक्रिय राजनीति में हैं अब दो धुरो में बंटता नज़र आ रहा हैं. एक तरफ अखिलेश हैं और दूसरी तरफ शिवपाल-मुलायम. पलड़ा अखिलेश का भारी दिख रहा हैं. परिवार के पांच लोक सभा सदस्य और एक राज्यसभा सदस्य हैं. अखिलेश के साथ चार लोक सभा सदस्य—डिंपल यादव, धर्मेन्द्र यादव, अक्षय यादव और तेज प्रताप सिंह यादव हैं. मतलब मुलायम अब अकेले हैं. राज्य सभा सदस्य रामगोपाल यादव भी खुली तौर पर अखिलेश के साथ हैं.

मुलायम-शिवपाल समझ गए की बात आगे बढ़ने पर पार्टी ही नहीं बल्कि परिवार भी टूट जायेगा. इसीलिए उनके तेवर ढीले पड़े और ५ जनवरी को बुलाया गया अधिवेशन कैंसिल कर दिया. रही बात परिवार के अन्य सदस्यों की तो अखिलेश ने तुरप की चल चलते हुए अंशुल यादव को करहल विधान सभा से टिकट दे दिया. अंशुल मुलायम के छोटे भाई राजपाल यादव के पुत्र हैं. मतलब मुलायम को उधर से भी समर्थन मिलना मुश्किल दिख रहा हैं. मुलायम के साथ प्रतीक यादव और उनकी पत्नी अपर्णा यादव ज़रूर हैं.

अखिलेश ने इसपर भी चाल चल दी हैं और अपर्णा का टिकट अभी नहीं घोषित किया हैं. मतलब प्रेशर अभी बना दिया गया हैं. शिवपाल भी बिलकुल अकेले केवल अपने पुत्र आदित्य और पत्नी सरला के साथ बचे हैं. मुलायम के समधी लालू प्रसाद यादव ने इस सिलसिले में मतभेद दूर करने की कोशिश भी की हैं लेकिन अभी कुछ हल नहीं निकला हैं. जब परिवार अखिलेश के साथ हैं तो पार्टी अपने आप उनके साथ आ गयी. खुद मुलायम भी ये बात समझते हैं इसीलिए मात्र १७ घंटे बाद अखिलेश का निष्कासन वापस ले लिया.

बर्फ पिघल रही हैं लेकिन सत्ता का हस्तांतरण अब होना ही हैं. परिवार से जुड़े लोगो के अनुसार मुलायम भी बेमन से अखिलेश के खिलाफ कार्यवाही कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी का ये घमासान असलियत में पार्टी के बीच का घमासान न होकर बल्कि परिवार में घमासान के कारण हैं. अब मुलायम के पास रास्ते कम बचे हैं.

पहली कोशिश वो ये कर सकते हैं की चुनाव आयोग के सामने अपने आपको असली सपा साबित कर ले जाये, जिसकी सम्भावनाये कम ही हैं या फिर जिद पर आ कर सपा का चुनाव चिन्ह फ्रीज़ होने तक लडे. नतीजा कुछ भी हो लेकिन मुलायम को २३ अक्टूबर को अपनी कही बात ज़रूर याद आ रही होगी. मुलायम ने पार्टी कार्यालय में सबके सामने अखिलेश से कहा था—तुम्हारी हैसियत क्या हैं. शायद अब उन्हें खुद अंदाज़ा हो गया होगा की हैसियत क्या हैं.

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