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युवाओं को अपने चेहरे नहीं प्रतिभा निखारने की जरूरत: शत्रुघ्न सिन्हा

गुवाहाटी: बिहार के अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने ब्रह्मपुत्र साहित्य महोत्सव में दीपा चौधरी के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने कहा- मैं तो कंपाउंडर बनने लायक भी नहीं था, लेकिन देश का स्वास्थ्य मंत्री भी बन गया. उन्होंने कहा कि वह मुंबई कोई स्टार बनने के लिए नहीं गए थे, बल्कि वह सिर्फ संघर्ष करना चाहते थे और एक अभिनेता बनना चाहते थे. लेकिन लोगों ने मुझे जो प्यार दिया उस के लिए शुक्रिया. उनहोंने कहा कि आज के युवाओं को मैं सुझाव देना चाहता हूं सर्वश्रेष्ठ से कुछ अलग खुद को साबित करें. दूसरों की नकल नहीं करें और अपनी भूमिका निभाएं.

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वन इंडिया के अनुसार, शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी जीवनी ‘एनीथिंग बट खामोश’ की बात करते हुए कहा कि यह किसी भी इंसान के जीवन पर सबसे ईमानदार और पारदर्शी तरीके से लिखी गई किताब है.
दिग्गज अभिनेता ने कहा कि उनकी किताब सबसे अधिक बिकने वाली किताब बन गई है. इसमें कोई सनसनी नहीं है. किताब में किसी महिला का अनादर नहीं किया गया है. इस के बावजूद यह किताब सब से अधिक बिकने वाली किताब बन गई है.
सिन्हा उस दौर को याद करते हैं जब कुछ लोगों ने उन्हें खूबसूरत दिखने के लिए अपने चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी कराने की सलाह दी थी लेकिन जब दिग्गज अभिनेता देव आनंद ने उन्हें ऐसा करने से रोका तो उन्होंने प्लास्टिक सर्जरी का ख्याल दिल से निकाल दिया. देव आनंद ने मुझ से कहा था कि जैसे हो वैसे ही बने रहो.
उसके बाद उन्होंने अपनी प्रतिभा और व्यक्तित्व को निखारने का काम किया और दुनिया को बताया कि मैं जैसा हूं वैसा ही मुझे स्वीकार किया जाए.
सिन्हा ने कहा कि आज के युवाओं को मैं सुझाव देना चाहता हूं सर्वश्रेष्ठ से कुछ अलग खुद को साबित करें. दूसरों की नकल नहीं करें और अपनी भूमिका निभाएं.
राजनीतिक जीवन के बारे मैं पूछे जाने पर उनहोंने कहा कि ऐसा उन्होंने समाज के प्रति अपने दायित्व के कारण किया क्योंकि वह समाज के लिए कुछ करना चाहते थे.

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