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युवाओं से टकराओ मत मोदी जी: अमीक जामेई

फ़हद सईद

नई दिल्ली 16 नवंबर 2016
हाल ही में भोपाल एनकाउंटर की न्यायिक जांच की मांग के लिए सत्याग्रह का आह्नवान करने वाले अमीक जामई की जद्दोजहद किसी परिचय की मोहताज नहीं है। देश में संघ द्वारा फैलाई गई नफरत की राजनीति में अमीक जामेई की आवाज सड़को से लेकर न्यूज चैनल के स्टूडियों में सुनाई देती है। अमीक जामेई जुल्म और नाइंसाफी के खिलाफ एक ऐसी आवाज जिसका होना बहुत जरुरी है। इस आवाज को गूंज बनाने के लिये यूवाओं का भी साथ मिल रहा है। पढ़िये सियासत टीम की अमीक जामेई से बातचीत पर आधार रिपोर्ट-
8 मुस्लिम युवाओ की एनकाउंटर के जरिये हत्या के बाद मुस्लिम सियासतदानो व उलेमाओ की खामोशी सवाल खड़ा कर रही है

भोपाल में 8 मुस्लिम युवाओ की एनकाउंटर के जरिये हत्या के बाद मुस्लिम सियासतदानो व उलेमाओ की खामोशी सवाल खड़ा कर रही है। आखिर ऐसा क्या हुआ है की सियासी दावतों और पोकेट मे अनगिनत तंजीमे लेके चलने वाले मुसलमानों के होलसोल रिप्रेसेंटेटिव बनने वाली तंजीमे जहां मुसलमानो को अनावश्यक मुद्दे मे उलझा रखा है जिसका समाज से कोई लेना देना नहीं है, भोपाल हत्याकांड पर इनकी खामोशी पर पूरा मुस्लिम समाज और युवा के सम्मान को चोट पहुंची है। अमीक भाई का मानना है मुस्लिम युवाओं से क उलेमाओ का इनका एहतेराम करे लेकिन सोशल जस्टिस की लड़ाई में भगत सिंह,अशफाक़उल्लाह खान और अंबेडकर की राह को अपनाये।

पुलिस द्वारा सुनियोजित तरीकों से हत्या को कानूनी डिकश्नरी में एनकाउंटर कहा जाता है

भोपाल जेल से निकले वाले विचारधीन क़ैदियो की हत्या ये इशारा करती है कि बहुत कुछ ऐसा है जिसकी पर्दादारी की जा रही है। पुलिस की स्क्रीप्ट की माने तो हाई सिक्यूरिटी लैस जेल से 8 कैदी एक साथं भाग निकले और उन्होंने एक गार्ड की भी हत्या कर दी इसके बाद उन्हें पकड़ कर मार गिराया गया। इस स्क्रीप्ट में ऐसे लू-पोल है कि इस कहानी पर यकीन नहीं किया जा सकता है। कुछ तो ऐसा है जिसको छुपाया जा रहा है। हमारी मांग है इस एनकाउंटर की न्यायिक जांच हो जिससे सब कुछ साफ हो जाये। लेकिन देश की यूवाओं की संविधान अधिकारों के तहत ये जायज मांग को नजरअंदाज किया जा रहा है। क्यो?

भोपाल हत्याकांड गुजरात मॉडल का एक्सटेंशन है

बेगुनाह मुसलमानो का एंकाउंटर का चलन देश में नया नहीं है। जिस गुजरात मॉडल का हवाला देकर मोदी देश की सत्ता हासिल किये उसी मॉडल में पूरे देश में इस मॉडल ने पैर पसारे है । भोपाल हत्याकांड इसी मॉडल का एक्सटेंशन है।

विपक्ष की आवाज कहां है?

संघ के रिमोट से चलने वाली मोदी सरकार के जुल्म के खिलाफ कौन खड़ा हो रहा है। विपक्ष की आवाज कहां है? मोदी सरकार के निरकुंशता को रोकने के लिए असली ल छात्र विश्वीद्यालय और युवा आगे आ रहे हैं। जवाहर लाल नेहरू विश्वीद्यालय के कन्हैया कुमार और शहला रशीद, गुजरात ऊना आंदोलन के जिग्नेश मेवानी और शमशाद पठान, , पाटीदार आंदोलन के हार्दिक पटेल, उर्दू मे प्रतिरोध की शायरी मे इमरान प्रतापगढ़ी, यह वो नाम है जिनके पीछे न कोई बड़ा घराना है न पैसे की ताकत है ना ही कोई बड़ा सियासी दल लेकिन इन नामों से आरएसएस और मोदी सरकार से सबसे ज़्यादा दिक्कत है।

आरएसएस निबटने के लिए केरला सरकार ने उनकी ट्रेनिंग पर बैन किया है। उत्तर प्रदेश की सरकार को भी इससे सबक लेना चाहिये

अमीक जामेई चाहते हैं आरएसएस निबटने के लिए केरला सरकार ने उनकी ट्रेनिंग पर बैन किया है। उत्तर प्रदेश की सरकार को भी इससे सबक लेना चाहिये। हमने तय किया है की भोपाल एंकाउंटर मामले मे जिस सत्याग्रह की शुरुआत जिग्नेश मेवानी और शमशाद पठान के साथ शुरू की गई है दरअसल यह संविधान बचाने की लड़ाई है। इसलिए हमने तय किया है की गुजरात मॉडल को धराशायी करने के लिए इस मुहिम मे आगे कन्हैया कुमार और शहला रशीद को भी जोड़ा जाएगा। अमीक जामेई ने कहा हार्दिक पटेल भी इस मामले मे अमीक जामेई के संपर्क मे हैं।

युवा राजनीति मे आए क्यूंकी राजनीति को अपनी कारोबार और रसूख बढ़ाने वाले अब कुछ नहीं कर सकते

अमीक जामेई ने युवाओ से कहा है की वो राजनीति मे आए क्यूंकी राजनीति को अपनी कारोबार और रसूख बढ़ाने वाले अब कुछ नहीं कर सकते, यह वक़्त युवाओ का है और उसे आगे बढ़कर संविधान की हिफाज़त मे आगे बढ़ना चाहिए।  वो हुकूमत से सवाल करे की लैंडलेस को ज़मीन कब मिलेगी? रोजगार कहा है? 15 लाख कहा है? क्यूं सरकार ने पुजीपतियों से जिसने आम आदमी की गाढी कमाई बैंको से क़र्ज़ पर लेके चाट गए वो वापस कब लेगी? माली और राष्ट्रपति के बच्चो के लिए शिक्षा कब एक होगी?

दलितों ने आरएसएस और गुजरात की सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर किया है फिर मुस्लिम समाज ऐसा क्यों नहीं कर सकता

अमीक जामेई ने युवाओ से अपील करते हुये कहा की उनको संघर्ष का रास्ता अपनाना होगा। गुजरात के दलित उनके लिए प्रेरणा है। गौरक्षकों ने दलितों को बांध के पीटा था उसके बाद पदयात्रा और संवैधानिक अधिकारो का इस्तेमाल करते हुये दलितों ने आरएसएस और गुजरात की सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर किया है। उनके इस लड़ाई में मुसलमानो ने भी उनका साथ दिया था।

अमीक जामेई का कहना है कि बिहार के बाद फासीवादी ताकत आरएसएस उत्तर प्रदेश से भी खदेड़ना है, इस मुहिम की शुरुआत मोदी जी के संसदीय सीट वाराणसी से होगी। अमीक जामेई ग़ैर भाजपा युवाओ को संघवाद के खिलाफ एक जगह लाने की कोशिश कर कर रहे है।

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