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यूएनओ मिशन : कॉन्गो में 22 बच्चों को आतंकी कब्जे से छुड़ाकर इंडियन आर्मी ने पेश की मिसाल

नई दिल्ली : भारत कांगो में हिंसा रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के नेतृत्व में भारतीय सैनिक अपना काम कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि कांगो में मोनूक के नाम से उसका अब तक का सबसे बड़ा शांति मिशन तैनात किया गया है यानि लगभग 17 हज़ार सैनिक जिसमें कांगो में तैनात संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन में इंडियन आर्मी की संख्यां सबसे ज्यादा है. इंडियन आर्मी जो यूएनओ मिशन के तहत डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कॉन्गो में तैनात है।  इन जवानों ने 22 बच्चों को ‘चाइल्ड सोल्जर’ बनने से बचा लिया। आर्मी के अधिकारियों ने बताया कि कॉन्गो के पूर्वी हिस्से के न्याबिऑन्डो गांव के 16 लड़के और 6 लड़कियों को 48 घंटे का बड़ा मिशन लॉन्च कर निकाला। अधिकारी ने बताया कि भारतीय सेना को 16 सितंबर को गांव के लोगों से जानकारी मिली थी कि कुछ हथियारबंद समूह कुछ बच्चों को ‘चाइल्ड सोल्जर’ बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके अलावा बाल संस्था सेव द चिलरेन का भी आरोप है कि बच्चों का सैनिकों के रूप में इस्तेमाल और बढ़ गया है और रोज़ सैंकड़ों बच्चों का अपहरण हो रहा है. अधिकारी ने बताया कि बाद में बच्चों के यूएन की चाइल्ड प्रॉटेक्शन एजेंसी को सौंप दिया।

उसी दिन, भारतीय सेना की एक अन्य बटालियन ने मिरकी इलाके के 200 परिवारों को पलायन करने से रोका था। अधिकारी ने बताया, ‘प्रतिद्वंद्वी समूहों के बीच लड़ाई के कारण पलायन किया जा रहा था, जिसकी वजह से पूरे इलाके में खौफ का माहौल था। इसके बाद सेना ने लड़ने वाले समूहों को बाहर निकाला और स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित किया। वर्तमान में दुनिया भर में 2,600 से ज्यादा भारतीय सैनिकों को यूएन मिशन के तहत तैनात किया गया है, जो कि सबसे बड़ा और सबसे जटिल संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन है।’ मध्य अफ्रीकी राष्ट्र के सबसे अस्थिर उत्तर किवो प्रांत में भारतीय ब्रिगेड को तैनात किया गया है।

गौरतलब है की ये देश दूसरे विश्व युद्ध के बाद के सबसे हिंसक संघर्ष को झेल रहा है. इस युद्ध में पचास लाख से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं, लाखों लोग भुखमरी और बीमारियों के शिकार हैं. यही नहीं, यहाँ लाखों महिलाओं और लड़कियों का बलात्कार भी हुआ है. ‘द ग्रेट वॉर ऑफ़ अफ़्रीक़ा’ कही जाने वाली इस लड़ाई में नौ देशों के सैनिक और आम लोगों के अलावा अनगिनत विद्रोही गुट एक दूसरे को निशाना बनाते रहे हैं और ये सब एक ऐसे बदक़िस्मत देश की सीमाओं के अंदर ही हो रहा है जिसका नाम है डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो.

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