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यूनिफार्म सिविल कोड, ट्रिपल तलाक पर विधि आयोग ने आम लोगों से मांगी राय

नई दिल्ली।तीन तलाक और यूनिफार्म सिविल के सवाल पर विधि आयोग ने लोगों से राय मांगी है। एक प्रश्नावली जारी कर आयोग ने पूछा कि क्या मौजूदा पर्सनल लॉ और प्रचलित रीतियों को मौजूदा समाज के तहत फिर से कोडिफाइड करने की जरूरत है।आयोग की ओर एक अपील के मुताबिक, इसका मकसद कमजोर समूहों के खिलाफ भेदभाव को खत्म करना और विभिन्न सांस्कृतिक रिवाजों को सुसंगत बनाना है।आयोग ने लोगों को भरोसा दिलाया कि किसी भी एक वर्ग, समूह या समुदाय के नियम-कायदे परिवार कानूनों में होने वाले सुधार की कोशिशों पर हावी नहीं होने दिया जाएगा।

आयोग की ओर से जारी सवालों की लिस्ट में क्या -क्या पूछा गया
क्या तीन तलाक का चलन खत्म कर देना चाहिए या इसे बरकरार रखा जाना चाहिए ।

क्या मुस्लिम समाज में तलाक की प्रक्रिया में उचित सुधार की जरुरत है।

क्या यूनिफार्म सिविल कोड को वैकल्पिक होना चाहिए।

क्या यूनिफॉर्म सिविल कोड में में तलाक, शादी, गोद लेने, बच्चों की कस्टडी, उत्तराधिकार और विरासत में मिली संपत्ति जैसे विषयों को भी शामिल किया जाना चाहिए।

आयोग आम लोगों से जानना चाहा कि क्या यूनिफार्म सिविल कोड से किसी व्यक्ति की मजहबी आजादी के अधिकारों का हनन होगा।

विधि आयोग ने परिवार कानूनों के पुनरीक्षण और उनमें सुधार के विषयों पर लोगों की राय मांगी है।

आयोग के अध्यक्ष रिटार्यड सुप्रीम कोर्ट के जज बीएस चौहान ने कहा, उम्मीद है कि आयोग समान नागरिक संहिता के औचित्य पर स्वस्थ चर्चा की शुरुआत कर पाएगा। उन्होंने अपील में कहा कि परिवार कानूनों में सुधार के तहत महिलाओं के अधिकारों को संवैधानिक प्रावधान, धार्मिक अधिकार एवं राजनीतिक वाद-विवाद के बजाय अपने आप में उद्देश्य समझा जाना चाहिए। सरकार ने जून में विधि आयोग से कहा था कि वह यूनिफार्म सिविल कोड के मुद्दे पर विचार करे।

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