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यूनेस्को की महत्वपूर्ण प्रसताव पारित: मस्जिदे अक्सा पर मुसलमानों का हक़, यहूदियों का दावा झूठा

वाशिंगटन:संयुक्त राष्ट्र इदारा बराए विज्ञान व संस्कृति यूनेस्को ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर मतदान के बाद मुसलमानों के क़िबला मस्जिदे अक्सा और दीवारे बुराक़ में यहूदियों के धार्मिक अनुष्ठानों के आयोजन के अधिकार का दावा झूठा करार दिया है, जिस पर इस्राईली सरकार की गंभीर प्रतिक्रिया सामने आई है.

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ETV के खबरों के अनुसार, यूनेस्को में गुरुवार को पारित होने वाले एक प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मस्जिद अक्सा और दीवारे बुराक़ पर यहूदियों का कोई अधिकार नहीं. यह जगह मुसलमानों का ऐतिहासिक धार्मिक स्थान है.
मतदान में 26 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में जबकि 6 ने विरोध में मतदान किया. 26 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया जबकि दो देश अनुपस्थित रहे.
इसराइल ने मतदान रोकने के लिए भरपूर कोशिश की और यूरोपीय देशों को मतदान से रोकने में सफल भी रहा. हालांकि इसके बावजूद बहुमत से प्रस्ताव पारित हो गई.
गौरतलब है कि इजरायल मस्जिद अक्सा की ऐतिहासिक और इस्लामी स्थिति को विकृत करने के लिए मन गढ़त शब्दों का प्रयोगकरता रहा है, यहाँ पर यहूदी अपना धार्मिक अधिकार जितलाने की नाकाम कोशिश करता रहा है.
यहूदी राज्य मस्जिदे अक्सा की जगह जबल हेकल और दीवारे बुराक़ के बजाय दीवारे गिरया शब्द का उपयोग करके इस पवित्र स्थान को यहूदी अपने रंग में रंगने की साजिशें करती रही है.
यूनेस्को की वेबसाइट पर मौजूद प्रस्ताव के लेख में कहा गया है कि मस्जिद अक्सा और दीवार बुराक़ केवल मुसलमानों की संपत्ति हैं जिन पर यहूदियों का कोई अधिकार नहीं.
प्रस्ताव के पारित होने पर इजराइल ने कड़ा विरोध जताया है.
प्रस्ताव के पारित होने के बाद एक बयान में इजरायली प्रधानमंत्री याखो ने कहा कि यह यूनेस्को का एक निरर्थक नाटक है जो पहले से चला आ रहा है.
याहू के अनुसार एक बार फिर यूनीस्को ने यह फैसला जारी किया है कि मस्जिदे अक्सा और पश्चिमी दीवार पर इस्राईल का कोई अधिकार नहीं है.
नयतन याखो का कहना है कि यूनेस्को के फैसले के अनुसार, मस्जिदे अक्सा और पश्चिमी दीवार से कोई संबंध नहीं है, यह ऐसा ही है जैसे कोई कहे कि दीवार चीन से चीन का कोई संबंध नहीं है, या मिस्र के पिरामिड से मिस्र से कोई संबंध नहीं है.
उधर फ़लस्तीनी सर्कार की ओर से यूनेस्को के फैसले पर सकारात्मक प्रतिक्रिया आई है. फिलिस्तीनी राष्ट्रपति पद के प्रवक्ता नबील अबु रदीना ने कहा है कि यूनेस्को का प्रस्ताव इसराइल के लिए स्पष्ट संदेश है.
इस फैसले के बाद इस्राएल को चाहिए कि वे फिलिस्तीनी राज्य को स्वीकार करते हुए बैतूल-मकदस को स्वतंत्रत फिलीस्तीनी देश की राजधानी मान ले और फिलिस्तीन में मुसलमानों और ईसाई समुदाय के पवित्र स्थान पर अपने वर्चस्व समाप्त करे.
गौरतलब है कि यूनेस्को इसी तरह के एक निर्णय में पिछले अप्रैल में एक प्रस्ताव के जरिए क़िबला अव्वल को मुसलमानों की संपत्ति घोषित कर चुकी है. इस समय यूनेस्को की नेतृत्व फ्रांस के पास थी.
हालांकि फ्रेंच सरकार ने इजरायली दबाव में आकर कहा था कि उसे यूनेस्को में होने वाली मतदान पर अफसोस है, और वह आगामी ऐसी किसी भी मतदान को रोकने की भरपूर कोशिश करेंगे.
खबरों के अनुसार यूनेस्को में गुरुवार को पारित होने वाली एक संकल्प में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मस्जिद अक्सा और दीवारे बुराक़ पर यहूदियों का कोई अधिकार नहीं. यह जगह मुसलमानों का ऐतिहासिक धार्मिक स्थान है.

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