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यूपी की 19 फीसद मुस्लिम आबादी में नहीं मिला बीजेपी को एक भी उम्मीदवार

लखनऊ। भाजपा की उत्तर प्रदेश के लिए पहली और दूसरी सूची में मुस्लिम नाम नदारद है। बीजेपी के उम्मीदवारों की लिस्ट में मुस्लिमों को टिकट ना देना  साफ जाहिर करता है इस बार यूपी के सियासी मैदान में ध्रुवीकरण की कोशिश होगी। एक तरफ उत्तर प्रदेश की 19 फीसदी मुस्लिम आबादी को बीजेपी ने दूरी बनाई है वहीं दूसरी तरफ मुजफ्फरनगर दंगो के आरोपी संगीत सोम और सुरेश राणा को टिकट देने से नहीं हिचकी है।

पश्चिम उत्तर प्रदेश में 2013 में हुए दंगों के बाद वहां की फिजाओं से अब तक हिंदु मुस्लिमों के रिश्तों में अब भी तनाव बाकि है। ऐसे में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का सबसे बड़ा केंद्र पश्चिम उत्तर प्रदेश ही बना हुआ है। यहां की राजनीति अब इसी बिंदु पर टिकी हुई है। ऐसे में बीजेपी ने यहां एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया है। मुजफ्फरनगर के दंगे के आरोप सुरेश राणा को थाना भवन और संगीत सोम को सरधना से टिकट देने के फैसले को ध्रुवीकरण की आग को इंधन देने की कोशिश की नजर से देखा जाएगा।

उत्तर प्रदेश  में  पिछले तीन विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने अब तक तीन विधानसभा चुनावों में दो मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है जिसमें दोनों की जमानत जब्त हो गई थी।

ने वैसे तो प्रत्येक जिले में अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का गठन किया हुआ है मगर पहली लिस्ट की 149 सीटों पर भाजपा को एक भी योग्य मुस्लिम प्रत्याशी नहीं मिला। वैसे विभिन्न जातियों का सामंजस्य सीटों पर प्रभावी नजर आ रहा है। यही नहीं दलबदल कर बीजेपी में आईं सपा के मंत्री रहे राजा अरिदमन सिंह की पत्नी रानी पक्षालिका को भी बाह विधानसभा सीट से उम्मीदवार चुन लिया गया है। इसी तरह से कई दलबदलुओं को बीजेपी ने टिकट से नवाजा है।

दल बदल कर बीजेपी में आईं सपा के मंत्री रहे राजा अरिदमन सिंह की पत्नी रानी पक्षालिका को भी बाह विधानसभा सीट से उम्मीदवार चुन लिया गया है। इसी तरह से कई दलबदलुओं को बीजेपी ने टिकट से नवाजा है। लखीमपुर की पलियाकलां सीट से बसपा छोड़ कर बीजेपी में आए रोमी साहनी को टिकट दिया गया है। इसी तरह से कई अन्य सीटों पर भी कुछ दूसरे दलों को छोड़ कर आए उम्मीदवार टिकट पा गए हैं।

टिकट वितरण में बीजेपी ब्राह्मण, वैश्य, क्षत्रिय, पिछड़े वर्ग और अनुसूचित जातियों का सामंजस्य बनाने का पूरा प्रयास किया है। सभी वर्गों का बराबर प्रतिनिधित्व सीटों पर दिखाई दे रहा है।

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