Monday , May 29 2017
Home / Election 2017 / यूपी चुनाव: राजा भैया ने भरा निर्दलीय नामांकन

यूपी चुनाव: राजा भैया ने भरा निर्दलीय नामांकन

इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद मण्डल के प्रतापगढ कुंडा विधानसभा सीट से अखिलेश सरकार के कैबिनेट मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने आज निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया। राजा ने सपा के टिकट पर चुनाव न लड़ने का एलान किया। हालांकि, सपा ने भी उनके विरुद्ध कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है।

चुनाव जीतने के बाद सपा को समर्थन देने का भी बयान राजा भैया ने दिया है। बता दें कि पूर्व में भी राजा भैया निर्दलीय ही चुनाव लड़े और जीते थे। जीतने के बाद उन्होंने अपना समर्थन समाजवादी पार्टी को दिया था और सपा सरकार में वह कैबिनेट मंत्री बनाए गए। राजा के नामांकन में उनके चचेरे भाई गोपाल जी व वकील के साथ हजारों की संख्या में पूरा कुण्डा ही उमड़ पड़ा। दिन में लगभग ढाई बजे प्रतापगढ़ कलेक्ट्रेट में नामांकन दाखिल किया गया। राजा भैया लगातार छह बार कुण्डा से विधायक बन चुके हैं।

कुण्डा विधानसभा सीट से रघुराज प्रताप सिंह के विरुद्ध भाजपा व बसपा ने भी अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। हालांकि, सपा व कांग्रेस का यहां से कोई प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ेगा। भारतीय जनता पार्टी ने जानकी प्रसाद पांडेय को टिकट दिया है, जबकि बसपा से परवेज अहमद चुनाव लड़ेंगे। सबसे खास बात यह है कि 6 बार से लगातार जीत दर्ज कर रहे राजा स्थानीय पंचायत चुनाव में भी जिस पर हाथ रख देते हैं वह चुनाव जीत जाता है। ऐसे में रघुराज के लिए ये प्रत्याशी कितनी चुनौती पेश कर सकेंगे यह देखना दिलचस्प होगा ।

प्रतापगढ जिले में आज भी राजा भैया की तूती बोलती है। राजघराने के युवराज राजा भैया 24 साल की उम्र में विधायक बन गए थे। अपने फास्ट एक्शन और रिएक्शन के लिए मशहूर राजा भैया न सिर्फ जनता के बीच लोकप्रिय हैं। बल्कि सपा सरकार के कद्दावर मंत्री के साथ ठाकुर वोटों पर सबसे तगड़ी पकड़ रखते हैं। मायावती सरकार में राजा को जेल जाना पड़ा था और आज भी मायावती से इनका 36 का आंकड़ा है।

वर्तमान प्रतापगढ़ जिले में जब रजवाड़ी हुआ करते थे, तब भदरी स्टेट पर राजा भैया का घराना ही राज करता था। राजा भैया यहां के राजकुमार थे। यानी राजा उदय प्रताप के बेटे। राजा की बेंती कोठी से निकलकर पहली बार राजा भैया 1993 में चुनाव लड़े और मात्र 24 वर्ष की उम्र मे विधायक बनकर राष्ट्रीय पटल पर छा गए।

राजा भैया ग्रेजुएट हैं और लखनऊ विश्वविद्यालय से उन्होंने पढा़ई की है, लेकिन राजा भैया पर लोकप्रियता के साथ-साथ आपराधिक मुकदमे भी लदते गए। अब तक पर तीन दर्जन से अधिक आपराधिक मामले राजा भैया पर दर्ज हैं। इनमें से आठ आपराधिक मुकदमों में न्यायालय ने संज्ञान लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने तो राजा भैया पर पोटा भी लगा दिया था। हालांकि बाद में वह पोटा से मुक्त हो गए। राजा पर बार-बार मुकदमे दर्ज होते रहे, लेकिन राजा का रूतबा हर दिन बढ़ता रहा।

राजा भैया के दबदबे और कद का अंदाजा इसी बात ने लगाया जा सकता है कि 1996 के बाद मायावती सरकार को छोड़कर वह हर सरकार में मंत्री बने। चाहे वह 1996 में पहली बार कल्याण सिंह की सरकार रही हो, 1999 में राम प्रकाश गुप्ता की सरकार रही हो, 2000 में भाजपा की राजनाथ सिंह सरकार और 2003 में सपा की मुलायम सिंह यादव की सरकार में भी राजा भैया को मंत्री पद से नवाजा गया, जबकि वर्तमान अखिलेश सरकार में भी वह मंत्री बनाए गए।

Top Stories

TOPPOPULARRECENT