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यूपी चुनाव: राम राम जपते जपते, राम नाम सत्य न हो जाए BJP

शम्स तबरेज़, सियासत न्यूज़ ब्यूरो।
लखनऊ: साल 2014 में लोक सभा चुनाव के वक्त BJP ने गुजरात मॉडल और नरेन्द्र मोदी को विकास का चेहरा बनाकर खूब प्रचार किया। प्रचार में एक से बढ़कर एक वादे किए लेकिन जब से केन्द्र में BJP की सरकार बनी तब से वादों को पूरा करने का नाम BJP भूल गई। सिर्फ वादे करने में आगे निकल चुकी BJP और उसके बढ़बोल नेताओं को बिहार से लेकर दिल्ली तक नाम कम और बदनामी ज़्यादा मिल रही है। उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव आते ही भाजपा को फिर से राम जी याद आ गए। जब से मोदी जी की सरकार बनी तब से भारत बीफ निर्यातक बड़े देशों की सूची में आ चुका है। आज हालत ये कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में बुचड़खानों का मुद्दा BJP बड़े ही ज़ोरो शोर से उठा रही है।
जिन फायर ​ब्रांड नेताओं के बल पर BJP 2017 की नय्या पार करना चाहती है, उन पर पहले से ही आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन नेताओं ने विवादित बयानों की झड़ी लगा दी है। कभी ये पश्चिमी यूपी को कश्मीर बन जाने की बात करते हैं तो कभी बुचड़खानों की। इन दिनों BJP के नेता पश्चिम यूपी में ऐसे ही विवादित मुद्दों के बल पर चुनाव जीतना चाहते है। अब तीन तलाक का मसला ले लिया या राम मंदिर का मुद्दा ही ले लिया जाए तो बीजेपी धर्म और आस्था के नाम पर पूरी सत्ता काब़िज़ करना चाहती है।
इन दिनों BJP नेता संगीत सोम, स्मृति ईरानी और रविशंकर प्रसाद को यूपी में चुनाव प्रचार का ज़िम्मा सौपा गया है। रविशंकर प्रसाद पहले ही साफ कर चुके हैं कि चुनाव बाद सरकार तीन तलाक़ के मद्दे पर कड़ा कदम उठाएगी। अब सवाल ये कि अगर BJP तीन तलाक के मुद्दे पर इतने कड़े कदम उठाएगी तब तो जनता भी इसी चुनाव में 2014 के लोकसभा में किए गए वादों पर कड़ा फैसला ले सकती है। BJPने अब तक 2014 में किए गए वादों पर कोई अमल नहीं किया है कहीं न कहीं BJP विकास के मुद्दों से भटक कर अपने जन्मकाल की ओर आगे बढ़ रही है। लेकिन यूपी की जनता भी काफी पढ़ी लिखी और समझदार है। जनता खासकर बहुसंख्यक हिन्दू भी ये बात पूरी तरह से समझ चुके है कि जब जब चुनाव आता है तब तब BJP राम नाम जपने लगती है कही इसी चुनाव में राम नाम जपते जपते BJP का राम नाम सत्य न हो जाए।

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