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यूपी चुनाव 2017: क्या मुसलमानों के सहारे सत्ता पाना चाहती हैं मायावती?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में राजनीतिक दल जाति व धर्म समेत हर तरह के हथकंडे अपनाते हैं। प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व बहुजन समाज पार्टी (BSP) अध्यक्ष मायावती ने वर्ष 2007 में सोशल इंजीनियरिंग के सहारे पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। उस समय उन्होंने 139 सीटों पर सवर्णो को टिकट दिया था, लेकिन बीते दस वर्षो में उनका झुकाव सवर्णो की जगह मुस्लिम मतदाताओं की ओर ज्यादा हो गया है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में अयोध्या सीट हमेशा सुर्खियों में रहती है। इस बार भी चुनाव से पहले अयोध्या विधानसभा सीट को लेकर चर्चा गरम है और इस क्षेत्र पर सबकी निगाहें टिकी हैं। दलित-मुस्लिम गठजोड़ फार्मूला को लेकर मैदान में उतरीं बसपा अध्यक्ष मायावती ने एक बड़ा दांव खेला है। इसी फार्मूला के तहत उन्होंने किसी मुस्लिम उम्मीदवार को इस सीट से मैदान में उतारा है। विदित हो कि 26 साल बाद किसी पार्टी ने अयोध्या सीट से मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट दिया है।

मायावती ने सोशल इंजीनियरिंग के सहारे जब 2007 में सरकार बनाई थी, तब उन्होंने 114 ओबीसी, 61 मुस्लिम, 89 दलित और 139 सवर्ण प्रत्याशियों को टिकट दिया था। सवर्णो में सबसे अधिक 86 ब्राह्मणों को प्रत्याशी बनाया गया था। उस समय उन्होंने 36 क्षत्रिय और 15 अन्य सवर्णो को टिकट दिया था। हालांकि वर्ष 2012 में बसपा अध्यक्ष ने इस फार्मूले को त्याग दिया था।

उन्होंने साल 2012 में 113 ओबीसी, 85 मुस्लिम, 88 दलित और 117 सवर्ण प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। सवर्णो की सीटों में कटौती की गई थी। सवर्णो में 74 ब्राह्मण, 33 क्षत्रिय और 10 अन्य प्रत्याशियों को टिकट दिया गया था। लेकिन चुनाव में बसपा को करारा झटका लगा था।

इस साल बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशियों को काफी अहमियत दी है। पार्टी ने 106 ओबीसी, 97 मुस्लिम, 87 दलित और 113 सवर्ण प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। पिछले चुनाव की तरह इस बार भी सवर्णो की सीटों में कटौती की गई है, लेकिन मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।

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