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यूपी पुलिस का बर्बर दमन झेलने वाले रिहाई मंच के राजीव यादव को न्याय मंच करेगा सम्मानित

लखनऊ : पिछले दिनों भोपाल एनकाउंटर की न्यायिक जांच की मांग पर करने पर  लखनऊ में बर्बर पुलिस दमन झेलने वाले रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव को 20 नवंबर को भागलपुर में न्याय मंच सम्मानित करेगा | इस मौके पर राजीव यादव रिहाई मंच के संघर्ष व अनुभव के साथ-साथ सत्ता द्वारा किये जा रहे ‘एनकाउंटर पॉलिटिक्स’ पर भी अपनी राय रखेंगे|

यूपी का सामाजिक व राजनीतिक संगठन ‘रिहाई मंच’ उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य हिस्सों में भी अल्पसंख्यकों-वंचितों के प्रश्नों पर साहसिक पहलकदमी कर रहा है | भोपाल में कथित सिमी कार्यकर्ताओं के कथित एनकाउंटर पर लखनऊ में रिहाई मंच ने विरोध प्रदर्शन किया था | इस विरोध प्रदर्शन के दौरान मंच के महासचिव राजीव यादव और अन्य कार्यकर्ताओं को पुलिस ने बुरी तरह से पीटा था | यूपी पुलिस ने मंच के महासचिव राजीव यादव को लगभग ढ़ाई घंटे तक सिमी आतंकी, कटुआ और पाकिस्तानी एजेंट बताकर पीटते हुए उन्हें लगातार फ़र्ज़ी एनकाउंटर में मारने की धमकी देते रहे|

उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ में जन्में 30 वर्षीय राजीव यादव पढ़ाई के दौरान भी मानव अधिकारों के उल्लंघन के मुद्दों को उठाते रहे हैं | इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट राजीव की सक्रियता को देखते हुए उन्हें इलाहाबाद आईसा का सचिव भी बनाया गया| इंस्टीट्यूट ऑफ़ मास कम्यूनिकेशन (आईआईएमसी) दिल्ली से पत्रकारिता की पढाई के दौरान ही रिहाई आन्दोलन’ से जुड़े थे | 2007 में शुरू हुआ ये ‘रिहाई आन्दोलन’ 2012 में बदलकर ‘रिहाई मंच’ बन गया |

कुछ वक़्त तक पत्रकारिता करने के बाद राजीव यादव ने यूपी की सियासत में काफी चर्चित डॉक्यूमेंट्री “सैफ़रन वार: ए वार अगेंस्ट टेरर”  और “पार्टिशन रिवीजीटेड” नाम से डॉक्यूमेंट्री बनाई | इस डॉक्यूमेंट्री का विरोध. करते हुए गोरखपुर सांसद योगी आदित्यनाथ ने राजीव को नक्सली समर्थक और इस्लामिक फंडेड बताया | मेरठ के चर्चित हाशिमपुरा कांड और मलियाना दंगे पर आयोजित किये गये एक सम्मेलन पर यूपी पुलिस ने इन पर दंगा भड़काने की कोशिश का आरोप लगाते हुए एफ़आईआर दर्ज करायी थी | लेकिन इस सब से न घबराते हुए राजीव पूर्वांचल में साम्प्रदायिकता के सवाल को पूर्वांचल में पूरी बेखौफ़ी से उठाते रहे हैं | 2013 में हुए .मुज़फ़्फ़रनगर दंगे के बाद मंच महासचिव ने संगीत सोम जैसे नेताओं के ख़िलाफ़ एफ़आईआर भी दर्ज करवाया |

2015 में मानवाधिकार कार्यकर्ता शाहनवाज़ आलम के साथ मिलकर राजीव यादव ने ‘ऑपरेशन अक्षरधाम’ नामक पुस्तक भी लिखी | गुजरात के अहमदाबाद में एक रिसर्च के दौरान राजीव को हिरासत में भी लिया गया | लेकिन पूछताछ के बाद इन्हें छोड़ दिया गया |. राजीव यादव लगातार सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर हैं लेकिन इन सबके बावुजूद भी मानव अधिकारों के मुद्दे और साम्प्रदायिकता के सवालों को उठा रहे हैं |

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