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यूपी में मुस्लिम वोट बिखर न जाए इसलिए एक हो रहे हैं मुस्लिम पार्टियां

उत्‍तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों के लिए जहां बड़ी पार्टियां कार्यकर्ताओं को इकट्ठा कर उन्‍हें प्रचार का तरीका समझा रही हैं। वहीं राज्‍य की स्‍थानीय पार्टियां मुस्लिम वाेटों का बिखराव रोकने के लिए एक मंच पर आने की तैयारी में हैं। इस कवायद के केन्‍द्र में हैं महाराष्‍ट्र के कारोबारी इस्‍माइल बाटलीवाला, जो कि आल इंडिया मुस्लिम महाज के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष और पॉलिटिकल यूनिटी कैम्‍पेन के संयोजक हैं। बाटलीवाला राज्‍य की उन सभी राजनैतिक पार्टियों को एक साथ लाना चाहते हैं जो मुस्लिमों की पैरोकारी का दावा करती हैं। एक बार यह पार्टियां एक साथ आ जाएं, फिर बाटलीवाला की मंथा किसी बड़े सेक्‍युलर पार्टी से गठजोड़ की कोशिश होगी। इस संबंध में आंध्र प्रदेश के बड़े मुस्लिम नेता असदउद्दीन ओवैसी से भी बात की जा रही है, ताकि उनकी पार्टी को भी गठबंधन में शामिल कराया जा सके। ओवैसी की पार्टी अगर यूपी के चुनावों में उतरती है तो भाजपा और कांग्रेस का गेम बिगाड़ने में वे कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। सबसे ज्‍यादा चिंता की बात मुलायम सिंह यादव के लिए है जिनकी पार्टी का बड़ा वोटबैंक मुस्लिम समुदाय से आता है।

फिलहाल इस कुनबे में 8 पार्टियां (पीस पार्टी, राष्‍ट्रीय ओलमा काउंसिल, परचम पार्टी, मुस्लिम मजलिस, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया, वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया और नेशनल लीग) शामिल हुई हैं।

इंडियन मुस्लिम लीग के प्रदेश अध्‍यक्ष डॉ. मतीन के मुताबिक, इसके मद्देनजर 1 मई और 24 मई को दो मीटिंग हो चुकी हैं। पार्टियों के नेताओं के बीच अगली बैठक 19 जुलाई को लखनऊ में बुलाई गई है। डॉ. मतीन के अनुसार, चुनावों के दौरान मुस्लिम वोटों का बिखराव आपस में होने से बचाने के लिए समीकरणों के हिसाब से प्रत्‍याशी उतारे जाएंगे। इस गठबंधन में सीटों का बंटवारा पार्टी की सियासी ताकत के आधार पर लिया जाएगा।

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