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यूपी में विकास और विनाश की लड़ाई

उत्तर प्रदेश में वैसे तो कई राजनीतिक परिवार हैं लेकिन इनमें मुलायम सिंह यादव के परिवार को काफी महत्व प्राप्त है। राज्य में इसी परिवार (सपा) की सरकार है। समाजवादी पार्टी के 5 सांसदों भी मुलायम सिंह परिवार के सदस्यों से ही हैं जिन में मुलायम सिंह यादव क्षेत्र संसद आजमगढ़, तेज प्रताप सिंह मैनपुरी, डिंपल यादव कन्नौज, धर्मेंद्र यादव बदायूं और अक्षय यादव फिरोजाबाद का प्रतिनिधित्व करते हैं।

मुख्यमंत्री पद पर मुलायम सिंह के पुत्र अखिलेश यादव ब्राजमान हैं और वर्तमान में मुलायम सिंह के भाई और अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव से उनके मतभेद चरम पर पहुंच चुके हैं। इन मतभेदों को दूर करने के लिए नेताजी मुलायम सिंह यादव भरपूर कोशिश कर रहे हैं। वे नहीं चाहते कि यादव परिवार में मतभेद का असर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में पड़े। मुलायम सिंह यादव को लगता है कि भाई और बेटे की लड़ाई भाजपा और बसपा के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

मुलायम सिंह के बारे में यह बात मशहूर है कि उनकी कही हुई बात को परिवार में कोई नहीं टाल सकता लेकिन ऐसा लग रहा है कि अखिलेश यादव अपने पिता की बात सुनने के मूड में नहीं है। अब सवाल यह उठता है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव के बीच इतना गंभीर मतभेद की वजह क्या है? अपने मूल कारण समाजवादी पार्टी में गुंडा गिरोह के सरगना से राजनेता बने मुख्तार अंसारी की क्यू ए डी विलय की कोशिश बताई जा रही है।

शिवपाल सिंह यादव मुख्तार अंसारी और उनकी पार्टी के समाजवादी पार्टी में विलय के पक्ष में थे जबकि अखिलेश यादव ने इसकी तीव्र विरोध किया। हालांकि पार्टी के अधिकांश नेता इस मामले में शिवपाल यादव के रुख के समर्थक थे। विश्लेषकों के अनुसार उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव सरकार जो रुख कर रही है वर्तमान स्थिति में यह आवश्यक था ऐसे में राज्य की जनता को उनका साथ देना चाहिए। पिछले दो वर्षों के दौरान युवा मुख्यमंत्री ने एक चीज दिखाई है कि सरकार को सही दिशा की ओर चलाया जाए। अखिलेश यादव के मुख्तार अंसारी की पार्टी समाजवादी पार्टी में विलय को स्वीकार करना कोई समस्या नहीं था लेकिन उन्होंने पार्टी में विलय के खिलाफ आवाज उठाने वाले एकमात्र व्यक्ति के रूप में उभरने को प्राथमिकता दी। उन्होंने अपने चाचा की नाराज़गी भी परवाह नहीं की।

अखिलेश के लिए भी कोई समस्या नहीं थी कि अपने प्रभावशाली चाचा (शिवपाल यादव) पसंदीदा अधिकारी को अधिक 3 महीने के लिए मुख्य सचिव के पद पर रखे लेकिन उन्होंने एक और अधिकारी राहुल भटनागर को मुख्य सचिव बनाने का साहस्यपुर्वक और बोल्ड फैसला किया। राहुल भटनागर एक प्रतिभाशाली अधिकारी माने जाते हैं। अखिलेश यादव के लिए भारी भरकम फ़ाइीलों मंजूरी में सुस्त रवि की प्रक्रिया भी इख्तियार करना मुश्किल नहीं था लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए सामने आई शिकायतों के आधार पर कदम उठाए क्योंकि उनकी नजर में यही सीधा रास्ता था।

यहां यह भी सवाल उठता है कि क्या अखिलेश यादव के पद मुख्यमंत्री में यूपी की स्थिति बेहतर है? इस सवाल का जवाब यही होगा कि नहीं, लेकिन किसी को भी यह बात स्वीकार करनी चाहिए कि युवा मुख्यमंत्री ने ऐसे कदम उठाए जो पहले कभी नहीं किए गए थे। उदाहरण के लिए 2009 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के घोषणापत्र में अंग्रेजी और कंप्यूटर पर प्रतिबंध लगाने पर जोर दिया गया था। सपा नेताओं का मानना ​​था कि अंग्रेजी और कंप्यूटर के कारण लोग नौकरी खो रहे हैं, लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव में इसी समाजवादी पार्टी ने अखिलेश यादव के नेतृत्व में युवाओं में 15 लाख लियाप टॉप बांटने का वादा किया और अपने इस वादे को पूरा भी कर दिखाया।

उत्तर प्रदेश में जो कुछ भी आईटी क्रांति आया है इसके लिए अखिलेश यादव को क्रेडिट दिया जाना चाहिए। उन्होंने न केवल अपनी पार्टी के टकसाली विचारधारा को बदल कर रख दिया बल्कि राज्य के युवाओं में सूचना प्रौद्योगिकी से निकटता पैदा कर दी। अखिलेश यादव चाहते हैं कि अतीत में आपराधिक रिकॉर्ड रखने या आपराधिक पृष्ठभूमि युक्त तत्वों के पार्टी में शामिल होने का मतलब पार्टी की बदनामी ऐसे में शिक्षाविदों और शिक्षित लोगों की पार्टी में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। अखिलेश यादव सरकार के कारनामों के बारे में राजनीतिक पंडितों का यह भी कहना है कि उत्तर प्रदेश में किसी और राज्य की तुलना में सबसे ज्यादा मेट्रो निर्माण किए जा रहे हैं।

अखिलेश यूपी के शहरों को अंतरराष्ट्रीय शहरों की तर्ज पर विकसित करने के इच्छुक हैं। इस संदर्भ में उन्होंने पिछले दो वर्षों के दौरान कई वैश्विक शहरों का दौरा किया है, यह भी कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में विद्युत अध्यक्षता में सुधार पैदा हुई है। अखिलेश यादव सरकार ने राज्य में सौर ऊर्जा के विकास को प्राथमिकता दी है इसके अलावा राज्य में वृक्षारोपण के कई रेकॉर्ड्स भी स्थापित किए। उन्होंने अपने राज्य को विकास दिलाने के लिए डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम, डॉ सत्यार्थी औरअरुणा चलम मरोगनथम जैसी हस्तियों को राज्य में लगातार आमंत्रित किया।

डॉ। कलाम अपने निधन से पहले यूपी का कई बार दौरा कर चुके थे। अखिलेश ने वाराणसी जैसे छोटे क्षेत्र में महा कुंभ मेला के दौरान करोड़ों लोगों के आने से निपटने में भी सराहनीय कदम उठाए। अखिलेश अपराधियों की उपस्थिति के लिए बदनाम इस राज्य की प्रतिमा बेहतर बनाने की कोशिशों में जुटे हैं। इस बारे में यह कहा जा सकता है कि अखिलेश ने पहले यह कदम क्यों नहीं किए तो इसका जवाब है कि वह पहली बार विधायक चुनकर मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए थे, तब उन्हें पार्टी में नाराजगी का भी डर था लेकिन अब उनके पास जनता के निर्णय की शक्ति है जो उन्हें स्थिर बना रही है।

एक बार डॉ। कलाम के कार्यालय से मुख्यमंत्री यूपी के नाम एक पत्र गया जिसमें यूपी के लाभ के लिए कुछ बिंदुओं पेश किए गए थे। बताया जाता है कि अंदरून दो दिन मुख्यमंत्री कार्यालय से इस पत्र का जवाब प्राप्त हुआ जिसमें डॉ. कलाम से उत्तर प्रदेश आने की इच्छा थी ताकि उनके आईडयाज़ के बारे में चर्चा की जा सके। मई 2005 के बीच में डॉ. कलाम ने यूपी का दौरा किया, इस मौके पर अखिलेश यादव ने वादा किया कि वह डॉ. कलाम के पेशकश 9 विकास बिंदुओं पर क्रियान्वयन को सुनिश्चित करेगा। इन बिंदुओं में से पहला बिंदु सोलार संयंत्र की स्थापना की थी। इस पर अखिलेश ने क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। इस संयंत्र कन्नौज के फतेहपुर में शुरू किया गया।

डॉ। कलाम ने 7 जुलाई 2005 को इसका उद्घाटन किया था। इसके बाद वाटर एटीएम एम्स, छत पर सोलार पियानलस आदि आईडयोंपर क्रियान्वयन की गई। अखिलेश यादव के बारे में कहा जा सकता है कि लगभग 5 वर्षों के दौरान उन पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं किया जा सका। राजनीतिक पंडितों के अनुसार अखिलेश का शुमार यूपी के सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री में होगा जो अन्य राजनाथ सिंह हैं।

वो कम समय में अपने पिता मुलायम सिंह यादव और मायावती से भी आगे निकल गए हैं। अब समाजवादी पार्टी में , एक तरफ वे लोग हैं जो अंग्रेजी और कंप्यूटर का विरोध करते हैं और दूसरी ओर वे लोग भी हैं जो अपराधियों की राजनीति में भागीदारी पर रोक लगाने की ख़ाहिश रखते हैं।

विश्लेषकों के अनुसार उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव सरकार जोपोज़िशन इख्तियार कर रही है वर्तमान स्थिति में यह आवश्यक था ऐसे में राज्य की जनता को उनका साथ देना चाहिए। पिछले दो वर्षों के दौरान युवा मुख्यमंत्री ने एक चीज दिखाई है कि सरकार को सही दिशा की ओर चलाया जाए ।

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