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यूपी: समाज की बेड़ियां तोड़ कर इस गांव की महिलाओं ने आजादी के बाद पहली बार डाला वोट

लखनऊ: आप को यह जान कर हैरत होगी कि उत्तर प्रदेश में एक ऐसा भी गांव है, जहां आजादी के बाद से महिलाओं ने वोट नहीं डाला. ऐसा नहीं है कि उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है या उनका वोटर कार्ड ही नहीं बन सका है. दरअसल पुरुष प्रधान समाज की दबंगई की वजह से इन महिलाओं को अब तक मतदान से वंचित रखा गया था. लेकिन आज आखिरकार इस गांव की महिलाओं ने सामाजिक बेड़ियों तोड़ीं और पहली बार वोट दिया.

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प्रदेश 18 के अनुसार, यूपी के लखीमपुर खीरी जिले के सहरवां गांव में वोट की लाइन में लगी यह महिलाएं सामान्य नहीं हैं. इन महिलाओं ने आज बरसों पुरानी परंपरा को तोड़ा है. घर की दहलीज से निकल कर पहली बार मतदान केंद्र तक पहुंची हैं. इससे पहले इस गांव की महिलाओं ने आज तक बूथ का मुंह नहीं देखा था. उन्हें अब तक यह पता ही नहीं था कि ईवीएम क्या होता है.
अब वर्षों बाद गांव के लोगों द्वारा बांधी गई बेड़ियाँ तोड़कर उन्होंने वोट दिया. वोट डालने के बाद मतदान केंद्र के बाहर खड़ी रुखसाना कहती हैं कि हमें काफी खुशी है. वहीं रेहाना कहती है लगता है जैसे हमारे पंख ही लग गए हों.

गांव के पूर्व प्रधान नत्थूलाल कहते हैं कि आजादी के बाद से ही इस गांव के पुरुष महिलाओं को वोट नहीं डालने देते थे. चाहे हिन्दू हो या मुसलमान, सभी पुरुषों का यह फरमान था कि महिलाएं वोट नहीं डालने जाएंगी. आजादी के बाद से अब तक यह एक तरह से इस गांव की परंपरा ही बन चुकी थी. गांव के प्रधान हसीबुल्लाह कहते हैं कि कुछ शिक्षा का उजाला है और कुछ लोगों में बढ़ती जागरूकता का असर है. समाज बदल रहा है तो हम भी बदल गए हैं.

आज जब वोटिंग शुरू हुई तो कुछ महिलाएं बूथ पर आना शुरू हुईं. धीरे धीरे हिंदू हो या मुसलमान सभी महिलाओं ने मतदान किया. हाल यह था कि कुछ महिलाओं ने तो ईवीएम को पहली बार देखा. उन्हें पता ही नहीं था कि वोट डालना कैसे है, बटन कहाँ दबाना है. मतदान कर्मियों की मदद से आखिर यह वोट डालने में सफल हुईं.
वैसे इस परंपरा को तोड़ने में जिला प्रशासन ने भी जी तोड़ कोशिश की. अधिकारियों के कई दौरे इस गांव में हुए, जहां लोगों को वोट देने के अधिकार के बारे में सूचित किया गया. शुरू में गांव के पुरुष महिलाओं को बूथ तक भेजने के पक्ष में नहीं थे लेकिन बाद में वह राजी हो गए. गांव के ही अलीमुल्लाह बताते हैं कि पिछली बार काफी प्रयास के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने वोट डाला था.

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