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यू.पी.एस.सी. में पारदर्शिता की माँग का स्वराज इंडिया ने किया समर्थन

नई दिल्ली। नवगठित राजनीतिक पार्टी स्वराज इंडिया ने यू.पी.एस.सी. जैसे संवैधानिक संस्थान द्वारा पारदर्शिता के मानकों पर खरा नहीं उतरने पर अफ़सोस जताई है। पार्टी ने सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे प्रतियोगी छात्रों की इस माँग का समर्थन किया है कि प्रारंभिक परीक्षा के समापन के तुरंत बाद उत्तर कुंजी सार्वजनिक की जाए, जैसा कि अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं और राज्य लोक सेवा आयोग भी पालन कर रहे हैं।

यू.पी.एस.सी. प्रारंभिक परीक्षा के लिए उत्तर कुंजी तब तक जारी नहीं करती है जब तक कि तीनों चरण की परीक्षा पूरी न हो जाये। जिसका नतीजा यह होता है कि उत्तर कुंजी जारी होते होते एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका होता है। मतलब उत्तर कुंजी तब मिलती है जब छात्रों ने अगले साल की प्रारंभिक परीक्षा भी लिख ली होती है। अकारण ऐसा विलंब उत्तर कुंजी को ही अप्रासंगिक बना देता है। यह भी बता दें कि प्रारंभिक परीक्षा में मिले अंकों का अंतिम वरीयता सूची में योगदान नहीं है इसलिए प्रतियोगियों के अंक या उत्तर कुंजी को रोक के रखने का कोई तर्क नहीं है।

आयोग की इस परंपरा के ख़िलाफ़ सीआईसी ने मृणाल मामले में एक कड़ा फ़ैसला सुनाया था। इसके बावजूद संघ लोक सेवा आयोग ने पारदर्शिता बहाल करने की कोशिशों पर रोक लगा रखी है।

पारदर्शिता की यह कमी चिंताजनक है क्यूंकि कई प्रतियोगी छात्रों ने प्रश्न या उत्तर कुंजी के संबंध में सवाल किए हैं। किसी तरह की गलती को ठीक करना तो दूर, यू.पी.एस.सी. ने माना ही नहीं है कि कोई सवाल भी है। इसलिए जिन छात्रों को इसके कारण परीक्षा की प्रक्रिया से बाहर होना पड़ा, उनके पास चुप चाप अन्याय झेलने या अदालत का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

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