Monday , May 1 2017
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ये रास्ते मुझमें चलते रहते हैं- रवीश कुमार

मुझे रास्तों से प्यार है. रास्तों को आँखों में भर लेना चाहता हूँ. किसी कविता की तरह तेज़ी से गुज़रते दृश्यों में बहुत देर तक ठहर जाता हूँ. कई बार पुरानी यादें चलने लगती हैं. बहुत बार नई यादें बनने लगती हैं. गानों में खो जाता हूँ. उनके मतलब दृश्यों के हिसाब से बदलते रहते हैं.

मेरा फोन कैमरा उन तस्वीरों को झटक लेना चाहता है. मैं इन्हीं तस्वीरों में कहीं धड़कता मिल जाऊँगा. देखना एक जुनून है. आप सबसे बेहतर सपने तभी देखते हैं जब सफ़र में होते हैं. साथ में कितनी कल्पनाएँ होती हैं. कुछ धुन, कुछ जुनून,कुछ सुबह, कुछ दोपहर. गुज़रना कई बार ख़ाली होना भी होता है. कई बार भरना भी होता है. रास्ते मुझमें चलते रहते हैं. मैं रास्तों पर चलता रहता हूँ.

 

 

 

 

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