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योगी के CM बनने के बाद, पीएम मोदी के लिए आसान नहीं होगा राज्य में समन्वय बनाए रखना

भाजपा भले ही उत्तर प्रदेश में भारी बहुमत से सरकार बना ली हो. मगर सीएम पद के लिए जिस तरह से उतार चढ़ाव देखा गया उससे साफ जाहिर होता है कि भाजपा के लिए बहुमत की उम्मीदों पर खरा उतरना कितना चुनौतीपूर्ण होगा. हालांकि काफी अटकलों के बाद अब यह साफ हो गया है कि यूपी के अगले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही होंगे. लेकिन इसके बाद पीएम मोदी के लिए राज्य के नेताओं के बीच समन्वय बनाए रखना आसान नहीं होगा.

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बीबीसी के एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी की नई सरकार बनने के बाद राज्य के नेताओं के बीच समन्वय बनाए रखना पार्टी के आलाकमान नरेंद्र मोदी और अमित शाह के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी, यह आसान नहीं होगा. क्योंकि पार्टी ने बहुमत मोदी के नाम पर हासिल किया है और नए मुख्यमंत्री का चुनाव भी उन्हीं की इच्छा के अनुसार हुआ है.

क़रीब डेढ़ दशक बाद सरकार में आई बीजेपी के सामने अब वो तमाम मुद्दे भी चुनौती के रूप में सामने आएंगे जिन्हें वह केंद्र और राज्य दोनों जगह पूर्ण बहुमत आने की बात कहकर टाल देती थी.

बीजेपी ने सरकार में आने से पहले जो वायदे किए थे, उन्हें पूरा करना और वो भी जल्दी, एक बड़ी चुनौती होगी. इन वायदों में ख़ासकर किसानों की कर्ज़माफ़ी का मुद्दा बहुत अहम है. ख़ुद अमित शाह कई जनसभाओं में ये कह चुके हैं कि कैबिनेट की पहली बैठक में किसानों का कर्ज़ माफ़ कर दिया जाएगा. ऐसी घोषणाओं पर जनता की निगाह और उम्मीद दोनों है, लेकिन अकेले राज्य सरकार के लिए इसे लागू करना आसान नहीं है. वहीँ राम मंदिर का मुद्दा को भी सुलझाना बीजेपी के लिए इतना आसान नहीं रहेगा.

बता दें कि बीजेपी ने सपा सरकार की क़ानून व्यवस्था को लेकर सबसे ज़्यादा मुद्दा बनाया था. जगह-जगह ज़मीनों के अवैध क़ब्ज़े से लेकर हत्या, अपहरण और बलात्कार जैसी घटनाओं को लेकर सपा सरकार को कठघरे में खड़ा किया जाता रहा था. ज़ाहिर है, नई सरकार के लिए क़ानून व्यवस्था को दुरुस्त करना न सिर्फ़ चुनौती होगी, बल्कि उसकी विश्वसनीयता का स्तर भी उससे तय होगा.

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