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योग दिवस के बहाने फिरकावाराना व आरएसएस का मुल्क तोड़ने का एजेंडा : अपोजीशन

Indian Muslims perform Yoga in Ahmadabad, India, Monday, Dec. 21, 2009. More than fifty Muslim men and women are taking part in a yoga camp conducted by Naresh Patel, a retired Police officer in Ahmadabad. (AP Photo/Ajit Solanki)

नयी दिल्ली। यूजीसी के एक हिदायत को लेकर सरगर्मी पैदा हो गया जिसमें इसने यूनिवर्सिटियों और कॉलेजों से कहा है कि आयुष वुजरा के योग प्रोटोकॉल का पालन करें जो 21 जून को योग दिवस समारोहों के दौरान ‘ओम’ और संस्कृत के कुछ श्लोकों के उच्चारण के साथ शुरू होगा. कांग्रेस ने जहां भाजपा नीत सरकार की ‘‘असंवेदनशील’ होने के लिए आलोचना की और कहा कि प्राचीन भारत का विषय योग भगवा दल का नहीं है वहीं जदयू ने इसे भारतीय जनमानस पर ‘‘फिरकावाराना एजेंडा को थोपने’ का एक और काेशिश करार दिया. कांग्रेस प्रवक्ता पी सी चाको ने कहा, ‘‘योग प्राचीन भारत की महान शिक्षा है.

यह भाजपा का नहीं है. इसे लोगों के परैक्टीस के लिए ज्यादा काबीले कुबूल सिस्टम बनाया जाना चाहिए मुमकीना यह सरकार इन संवेदनशील पहलुओं से नावाकिफ है.’ जदयू के सिनियर लिडर के सी त्यागी ने सरकार की तनकीद करते हुए कहा, ‘‘भारतीय जनमानस पर सांप्रदायिक एजेंडा को थोपने का यह एक और काशीश है. हम इसके खिलाफ हैं. आप किसी मुस्लिम, सिख, ईसाई से ‘ओम’ कहने के लिए कैसे कह सकते हैं. मैं हिंदू हूं और मुझे कोई मसला नहीं है लेकिन आप दूसरे मजहब के लोगों से कैसे कहेंगे. यह फिर सांप्रदायिकता है…आरएसएस का विभाजनकारी एजेंडा है. हम इसकी निंदा करते हैं.’ पिछले हफ्ते विश्वविद्यालयों को जारी पत्र में यूजीसी के सचिव जसपाल एस संधू ने कुलपतियों से योग दिवस मनाने के लिए अपने विश्वविद्यालयों और संबंधित निकायों में ‘‘व्यक्तिगत रुप से शामिल’ रहने को कहा है. यूजीसी के वरिष्ठ अधिकारी ने अपने पत्र में कहा है, ‘‘मैं आपसे आग्रह करता हूं कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए कार्य योजना बनाएं और योग दिवस समारोहों में अपने विश्वविद्यालय के काफी संख्या में छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करें।’ पत्र के साथ आयुष मंत्रालय का योग करने के लिए 45 मिनट का प्रोटोकॉल भी जोडा गया है. प्रोटोकॉल के मुताबिक योग में हिस्सा लेने वाले नौ मिनट के लिए योगासन में बैठेंगे और आखिर में ‘शांति पाठ’ होगा.
 
माकपा लीडर बृंदा करात ने कहा कि ‘ओम’ का उच्चारण लाज्मि करने का सरकार को कोई हक नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा ठीक नहीं है. वे काफी सांप्रदायिक एजेंडा को बढाना चाहते हैं. उनके एजेंडा से हर कोई वाकिफ है और वह है दूसरे तबकों पर मजहबी यकीन को थोपना। कोई इसे कुबूल नहीं करने जा रहा है.’ अनुपम खेर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से भारत का इज्जत बढा है. उन्होंने कहा, ‘‘सौ से ज्यादा मुल्कों में योग हुआ. हमने दुनिया को योग दिया। 

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