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रंगनाथ आयोग और सच्चर सिफारिशों के आधार पर मुसलमानों के लिए आरक्षण की मांग

लखनऊ: मुसलमानों की शैक्षिक और आर्थिक और सामाजिक पिछड़ेपन के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार धर्मनिरपेक्ष पार्टियां हैं जो सांप्रदायिकता के अंत और धर्मनिरपेक्षता की रक्षा के नाम पर आजादी के बाद से आज तक मुसलमानों के वोट हासिल करती आ रही हैं लेकिन उनके संवैधानिक अधिकार देने में आंाकानी करके हमेशा राजनीतिक पाखंड व्यक्त करती रही हैं। यहां लखनऊ में आयोजित शैक्षिक और विकास सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के प्रमुख उलेमा अहले सुन्नत ‘मशाईख और सजादगान और शिक्षाविदों ने इस रचनात्मक एजेंडे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एक प्रस्ताव पारित करके यह मांग की गई कि मुसलमानों को सच्चार कमेटी और रंगनाथ आयोग की सिफारिशों के आधार पर शिक्षा संस्थानों और नौकरियों में आरक्षण दिया जाए।

सम्मेलन में इस बात पर सहमति जताई गई कि अगर सच्चार कमेटी और रंगनाथ आयोग की सिफारिशों पर मुसलमानों की शैक्षिक ओ राकतसादी पिछड़ेपन को दूर करने के लिए आरक्षण देने पर गंभीर कदम उठाए गए होते तो उनकी पिछड़ेपन के अंत की शुरुआत हो सकती थी। लेकिन यह बेहद अफसोस की बात है कि इन दोनों सिफारिशों को नजरअंदाज करके धर्म के आधार पर आरक्षण खिलौने देकर मुसलमानों को फिर से गुमराह करने की कोशिश की जा रही है जो अस्वीकार्य है।

अल्हाज सय्यद वाहिद हुसैनी चिशती सैक्रेटरी अंजुमन ख़ुद्दाम ख़्वाजा सय्यद ज़ादगान दरगाह अजमेर शरीफ़ ने  बैठक की अध्यक्षता की जबकि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास और वित्तीय निगम’ भारत सरकार के पूर्व चेयरमैन पाठक मोहम्मद मियां मज़हरी ने उद्घाटन भाषण दिया| देश के प्रमुख माहरपलीम प्रोफेसर हलीम खान कादरी (पूर्व अध्यक्ष मध्यप्रदेश मदरसा बोर्ड) ने मदारिस इस्लामिया को असरी उलूम यानी विज्ञान ‘प्रौद्योगिकी और अंग्रेजी आदि से जोड़ने के प्रस्ताव पर अपने प्रमुख नोट में एक पूरी योजना पेश किया।

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