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रघूराम राजन के तक़र्रुर से इस्लामी बैंकिंग के क़ियाम को तक़वियत

हुकूमत के इक़तिसादी मुशीरे आला रघूराम राजन को रिज़र्व बैंक आफ़ इंडिया (आर बी आई) के नए गवर्नर की हैसियत से मुक़र्रर किए जाने के बाद मर्कज़ी वज़ीर‍ ए‍ अक़लीयती उमूर के रहमान ख़ान ने आज उम्मीद ज़ाहिर की कि हिंदुस्तान में इस्लामी बैंकिंग क

हुकूमत के इक़तिसादी मुशीरे आला रघूराम राजन को रिज़र्व बैंक आफ़ इंडिया (आर बी आई) के नए गवर्नर की हैसियत से मुक़र्रर किए जाने के बाद मर्कज़ी वज़ीर‍ ए‍ अक़लीयती उमूर के रहमान ख़ान ने आज उम्मीद ज़ाहिर की कि हिंदुस्तान में इस्लामी बैंकिंग को फ़रोग़ देने से मुताल्लिक़ उन के मंसूबे को ज़बरदस्त तक़वियत मिलेगी।

रहमान ख़ान ने कहा कि हाल ही में तजवीज़ के साथ उन की मुलाक़ात के मौक़े पर राजन ने इंतिहाई मुसबत रद्द-ए-अमल का इज़हार किया था। वज़ीर‍ ए‍ अक़लीयती उमूर ने पी टी आई से बातचीत करते हुए कहा कि राजन की क़ियादत में मालियाती इस्लाहात कमीशन ने इस्लामी बैंकिंग निज़ाम की परज़ोर वकालत की थी। मुझे यक़ीन हीका रिज़र्व बैंक के गवर्नर की हैसियत स्यान का तक़र्रुर इस मंसूबे को ज़बरदस्त तक़वियत पहुंचाएगा।

रहमान ख़ान ने ये इशारा भी दिया कि वज़ारत फैनान्स और रिज़र्व बैंक आफ़ इंडिया में मज़हबी नुक्ता-ए-नज़र का हामिल होने के सबब इस्लामी बैंकिंग निज़ाम के नज़रिया के बारे में ख़दशात पाए जाते हैं। महिज़ मज़हबी वजूहात की बिना पर ऐसा किया जा रहा है। चिट फ़ंड कंपनियों और दीगर मालियाती तिजारती कंपनीयों वग़ैरा के लिए बड़े पैमाने पर रक़ूमात वसूल की जाती हैं और कुछ अर्सा बाद रक़म जमा करने वाले ग़ायब होजाते हैं लेकिन आप एक ऐसा मालियाती निज़ाम नहीं चाहते जो शरई बुनियादों पर मबनी है।

वज़ीर‍ ए‍ अक़लीयती उमूर ने मज़ीद कहा कि दुनिया भर में इस्लामी बैंकिंग निज़ाम पर अमल आवरी जारी है और इस से ना सिर्फ़ मुस्लमानों को अपने लिए अपनी रक़ूमात जमा करने की सहूलत हासिल होगी बल्कि मुल्क की तरक़्क़ी के लिए भी इन रक़ूमात से इस्तिफ़ादा किया जा सकता है। उन्होंने मज़ीद कहा कि चंद मुस्लमान ऐसे भी हैं जो महिज़ बैंकों में इस लिए अपनी रक़ूमात जमा नहीं करते कि वहां उन्हें सूद दी जाती है क्योंकि सूद लेना और देना इस्लामी शरई निज़ाम के मुग़ाइर है। चूँकि मौजूदा बैंककारी निज़ाम सूद पर मबनी है जिस के नतीजे में मुस्लमानों की एक कसीर तादाद उस निज़ाम में शामिल नहीं है।

रहमान ख़ान ने कहा कि हम बहुत कुछ बचत करसकते हैं और हम अपनी तरक़्क़ीयाती-ओ-तालीमी ज़रूरीयात की तकमील करसकते हैं। मिस्टर रहमान ख़ान ने 12 दिसम्बर को आर बी आई के गवर्नर के नाम अपने एक मकतूब में कहा था कि दस्तूर में अपने तमाम शहरियों को उन के अक़ाइद के मुताबिक़ अमल करने की इजाज़त दी है। चुनांचे ममलकत की ये ज़िम्मेदारी है कि वो अपने अवाम को उन के मुताल्लिक़ा मज़ाहिब के मुताबिक़ अमल करने की सहूलत फ़राहम करे। इस तरह उन्होंने मुस्लमानों के लिए इस्लामी बैंकिंग निज़ाम के क़ियाम की ज़रूरत पर ज़ोर दिया था।

रहमान ख़ान के पेशरू सलमान ख़ुरशीद ने जो अब वज़ीर-ए-ख़ारजा हैं, सब से पहले ये नज़रिया पेश किया था और आर बी आई से कहा था कि वो हिंदुस्तान में इस्लामी बैंककारी निज़ाम के क़ियाम के इमकानात तलाश करे।

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