Saturday , September 23 2017
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रमजान में जान बचाने से बड़ा सवाब क्या?

कर्नलगंज: कल आप लोगो ने न्यूज़ पेपर और टीवी न्यूज़ में इक कानपुर का हादसा सुना और पढ़ा होगा कि बुधवार को गंगा बेराज पे गंगा में डूबने से 7 नवयुवको की मोत | जिसमे 6 हिन्दू दोस्त थे और एक अनजान मुस्लिम | हुआ ये था बुधवार को गंगा बैराज 6 नौजवानों को डूबता देख बचाने के लिए कूदे मकसूद ने डूबने वालो का धर्म नही , अपना फर्ज देखा | वह रोजे से था , मुह में पानी जाने से रोजा टूटने का डर था | लेकिन इंसानी जान बचाने से ज्यादा सवाब ( पुण्य ) कहाँ , ये सोचकर वो गंगा में कूद गया | सौहार्द का सन्देश देते हुए मकसूद ने दुनिया छोड़ दी | तंग गलियों में मकसूद की जिंदगी कटी लेकिन मकसूद का दिल तंग नही था | कर्नलगंज के गम्मु खां हाते में मकसूद का परिवार रहता है| पिता नही है |
परिवार में माँ फरीदा, बड़े भाई मंसूर , अपनी पत्नी और दो बच्चो के साथ रहते है | मंसूर ने बताया की मकसूद पढने में होशियार था सो अपनी कम आमदनी में भी मकसूद को पढ़ाते रहे | पुरे घर की जिम्मेदारी अपने कंधो पर उठाये मंसूर की ख्वाहिश थी की मकसूद सरकारी नौकरी करे | भाई की ख्वाइश पूरा करने के लिए मकसूद जी- जान से जुटा भी था | एमकाम करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओ की तैयारी कर रहा था | सरकारी नौकरी की ख्वाहिश मकसूद के साथ चली गई | मकसूद तो वापस नहीं आया लेकिन बैराज पर उसके साथ रहे अल्तमश ने जो उसके भाई मंसूर को बताया वह न भूलने वाला है |
मकसूद के साथ बैराज पर गए अल्तमश ने भी छह युवको को डूबता देखा था लेकिन तेज बहाव में उतरने की हिम्मत नही जुटा पाया| मकसूद आगे बढ़ा तो अल्तमश ने कहा की मुह में पानी गया तो रोजा टूट जायेगा| रमजान में किसी की जान बचाने से बड़ा सवाब क्या होगा,

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यह कहते हुए मकसूद ने गंगा में छलांग लगा दी | मकसूद ने डूब रहे अर्जुन को बचा लिया | इसके बाद सचिन को किनारे लाने के लिए हाथ पकड़ा लेकिन डूब रहे अन्य युवको ने सचिन को पकड़ लिया इसके चलते भार बढ़ा और मकसूद भी गंगा में समा गया | जाते- जाते परिवार को एक पहचान दे गया काश ये बात भी टीवी न्यूज़ चैनल वाले बताते तो आपसी सौहार्द का अच्छा सन्देश समाज को जाता

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