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रसूलुल्लाह स0 की तालीमात पर अमल आवरी की तलक़ीन: मुफ़्ती मुकर्रम

नई दिल्ली 20 जुलाई: शाही इमाम मस्जिद फ़तह पूरी दिल्ली मुफ़्ती मुहम्मद मुकर्रम अहमद ने आज जुमा की नमाज़ से क़बल ख़िताब में कहा कि माह रमज़ान उल-मुबारक में रसूल मुकर्रम बहुत ज़्यादा मेहरबान होते थे

नई दिल्ली 20 जुलाई: शाही इमाम मस्जिद फ़तह पूरी दिल्ली मुफ़्ती मुहम्मद मुकर्रम अहमद ने आज जुमा की नमाज़ से क़बल ख़िताब में कहा कि माह रमज़ान उल-मुबारक में रसूल मुकर्रम बहुत ज़्यादा मेहरबान होते थे

हर माँगने वाले को अता फ़रमाते थे और क़ैदीयों को रिहा किया करते थे। इस माह-ए-मुबारक में ज़्यादा से ज़्यादा इबादत करनी चाहिए इसके बरअक्स देखा ये जा रहा है कि उम्मत मुस्लिमा के मुतहारिक‌ गिरोह उस महीना में भी अपनी जंगी कारगुज़ारियों को जारी रखे हुए हैं और एक दूसरे पर हमलों की वारदातें भी मामूल की बातें बन गई हैं।

उस की मिसाल इराक़ शाम और मिस्र वग़ैरह‌ मिलती हैं। आप ने अपील की कि अस्वा रसूल की पैरवी में इस माह मुक़द्दस का एहतिराम किया जाये और हमलों को बंद किया जाये। आप ने कहा कि बंगलादेश की एक ट्रब्यूनल ने 1971-ए- के मुक़द्दमात में ग़ुलाम आज़म को 90 साल की सज़ाए क़ैद की सज़ा सुनाई है

वो ख़ुद 91 साल के हैं। ऐसे ही ट्रब्यूनल ने अली अहसन मुजाहिद को सज़ाए मौत सुनाई है। रमज़ान उल-मुबारक में इस तरह का अमल नहीं होना चाहिए। शाही इमाम साहिब ने कहा कि फ़तह पूरी मस्जिद में दो जमाओं से क़ुरआन-ए-करीम की तौहीन की वारदातें होरही हैं जिस से हर मुस्लमान को दिली सदमा है अगरचे मुक़ामी पुलिस आफ़िसरान मुस्तइद्दी के साथ कार्रवाई कररहे हैं

इस सिलसिले में हमारा वज़ीर-ए-आज़म वज़ीर-ए-दाख़िला और लेफ़्टिंनेंट गवर्नर से मुतालिबा है कि उस की आला सतही जांच कराई जाये और आइन्दा ऐसी वारदात ना हो इस बात को यक़ीनी बनाया जाये। उन्होंने श्रीनगर के लाल चौक पर कश्मीरी रोज़ा दारों पर बी एस एफ़ की फायरिंग और सलामती दस्तों के ज़रिया मस्जिद में घुस कर क़ुरआन-ए-करीम की बे हुरमती और एक आलम दीन के साथ शदीद मारपीट की मुज़म्मत की।

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