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रांची मुंसिपल कॉर्पोरेशन में करोड़ों का घोटाला

रांची मुंसिपल कॉर्पोरेशन में पब्लिक के पैसे की बंदरबांट हो रही है। आम लोग से करोड़ों का टैक्स लेकर कॉर्पोरेशन के मुलाज़िम आपस में बांट रहे हैं। इसका खुलासा बुध को उस वक़्त हुआ जब कॉर्पोरेशन के टैक्स कलेक्टर परमहंस कुमार ने ऑफिस

रांची मुंसिपल कॉर्पोरेशन में पब्लिक के पैसे की बंदरबांट हो रही है। आम लोग से करोड़ों का टैक्स लेकर कॉर्पोरेशन के मुलाज़िम आपस में बांट रहे हैं। इसका खुलासा बुध को उस वक़्त हुआ जब कॉर्पोरेशन के टैक्स कलेक्टर परमहंस कुमार ने ऑफिस एसिस्टेंट रामकृष्ण कुमार को खत लिखा। कुमार ने लिखा है कि कैशियर अमरेंद्र सिन्हा को 31 मार्च 2014 को उन्होंने टैक्स कलेक्शन के 11, 78, 515 रुपए दिए थे। लेकिन, उन्होंने वह पैसे अब तक ट्रेजरी में जमा नहीं कराए। ये रकम को रोकड़ रजिस्टर में भी नहीं चढ़ाया।
कुमार के खत पर कॉर्पोरेशन के ओहदेदार रामकृष्ण ने उसे व कैशियर अमरेंद्र को बुलाकर पूछताछ की तो अमरेंद्र ने कुबूल किया कि उसने कुमार से पैसे लिए हैं।

अमरेंद्र ने बताया कि वह पैसा अकाउंटेंट बसंत तिवारी के मांगने पर उनको दे दिया था। उसने बताया कि 30 लाख रुपए से ज़्यादा की रकम लेखा ओहदेदार को दी है। जब वे पैसा नहीं देते, तब तक ट्रेजरी में जमा करना मुमकिन नहीं है। इस वजह से टैक्स कलेक्टर को भी रसीद नहीं दी। रामकृष्ण ने इस घालमेल की जानकारी सीईओ को देते हुए पूरे मामले की संजीदगी से जांच कराने की शिफारिश की है।

ऐसे पकड़ में आया मामला

कॉर्पोरेशन सीईओ ओमप्रकाश साह ने मामले को पकड़ा और आमदनी ओहदेदार व लेखा ओहदेदार को जांच करने की हिदायत दिया। सहायक कार्यपालक ओहदेदार ने जब टैक्स कलेक्टर और कैशियर को अपने दफ्तर में बुलाकर पूछताछ की तो यह खुलासा हुआ। हालांकि, पहले कैशियर पैसा नहीं देने की बात करता रहा, लेकिन जेल की धम्की पर 11.78 की जगह 30 लाख का खुलासा कर दिया।

क्या है दस्तूरुल अमल

टैक्स कलेक्टर को कलेक्शन का सारा पैसा उसी दिन जमा करना लाज़मी है। वह रजिस्टर में इंट्री कर पैसा कॉर्पोरेशन कैशियर के पास जमा करता है। रकम जमा लेने के बाद कैशियर टैक्स कलेक्टर को पैसे का तहरीरी तफ़सीलात देकर कैशबुक में इंट्री करता है। इसके बाद कैशियर पैसा बैंक भेज देता है। बैंक में जमा पैसे की रसीद रोकड़ बही में चिपकाई जाती है। रोकड़ बही लेखा ओहदेदार के पास भेजा जाता है। लेखा ओहदेदार रोकड़ बही और बैंक में जमा किए गए रसीद का मिलान करने के बाद अपने रजिस्टर में उसकी इंट्री करते हैं।

खुलेगी करोड़ों की गड़बड़ी

अभी तो एक टैक्स कलेक्टर के खत के बाद महज़ 11.78 लाख रुपए की बंदरबांट का मामला सामने आया है। कॉर्पोरेशन में तकरीबन 35 टैक्स कलेक्टर हैं। ऐसे में दीगर टैक्स कलेक्टर की तरफ से जमा किया गया पैसा की भी बंदरबांट होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। पूरे मामले की जांच सही तरीके से हो तो नीचे से ऊपर तक के ओहदेदार का कारनामा का पर्दाफ़ाश होगा।

मामला संगीन , होगी जांच : एसीईओ

कॉर्पोरेशन एसीईओ रामकृष्ण कुमार ने कहा कि टैक्स कलेक्टर ने 11.78 लाख रुपए 31 मार्च 2014 को कैशियर के पास जमा कराने की बात कही है। लेकिन कैशियर ने रसीद नहीं दी। कैशियर ने भी यह कबूला है। उसने कहा है कि लेखा ओहदेदार के पास 30 लाख से ज़्यादा रकम है, इसलिए रोकड़ में पैसा नहीं चढ़ाया गया है। संगीन मामला है। जांच के बाद मुजरिमों पर कार्रवाई होगी।

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