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राख में दबी मिली 5 घंटे की बच्ची

मंदसौर: इस मासूम की पैदाइश 5 घंटे पहले ही हुई थी और उसे मरने के लिए छोड़ दिया. बेरहम मुल्ज़िम गांव के बाहर कचरे के ढेर पर राख में बच्ची को दबा कर चले गए और कही बच न जाए यह सोचकर जाते-जाते सीने पर 10 किलो का पत्थर भी रख गए.
जुमे के रोज़ ऐसी ही हालत में एक नोमुलूद बच्ची मिली. शुक्र है वहां से गुजरती एक खातून ने उसके रोने की आवाज सुन ली और गांव के लोगों की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया. फिलहाल बच्ची एसएनसीयू में शरीक है. डॉक्टर के मुताबिक बच्ची के जिस्म पर कुछ खरोंच के निशान हैं. उसकी हालत अब ठीक है.

गांव वालों के मुताबिक दोपहर दो बजे गांव की एक खातून रेशमा दोरवाड़ी रास्ते से जा रही थी तभी बच्चे के रोने की आवाज सुन वह घबरा गई. खातून ने गांव के लोगों को इत्तेला दी. लोग मौके पर पहुंचे तो देखा पत्थरों के बीच राख के ढेर में दबी एक नोमुलूद बच्ची रो रही थी. उसके सीने पर पत्थर भी था.

गांव वाले बच्ची को लेकर गांव पहुंचे. यहां आशा कारकुना ने उसे नहलाया. इस बीच पुलिस व एम्बुलेंस 108 को इत्तेला दे दी. एंबुलेंस के गांव पहुंचने में देरी हुई तो गांव वाले उसे जिला अस्पताल ले गए. यहां डॉक्टरों की टीम ने फौरन इलाज शुरू कर दिया.

जिला अस्पताल में बच्ची का इलाज कर रहे डॉ. प्रकाश कारपेंटर ने बताया बेबी प्री-मैच्योर है. उसकी पैदाइश 4 से 5 घंटे पहले ही हुई है. बच्ची के जिस्म पर हल्के चोट के निशान हैं जो रगड़ से लगे होंगे. इब्तिदायी इलाज के बाद बच्ची को एसएनसीयू में शरीक किया है. डॉ. कारपेंटर के मुताबिक बच्ची की हालत फिलहाल ठीक है.

ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. अारके खाद्योत के मुताबिक अगर बच्ची इसी हालत में एक घंटा और पड़ी रहती तो उसकी जान भी जा सकती थी. बच्ची के जिस्म में ग्लूकोज की मिकदार कम हो जाती तो फिर उसे बचाना मुश्किल होता. गांव में कितनी प्रेग्नेंट ख्वातीन हैं, उनकी जानकारी आंगनवाड़ी कारकुनो के पास रहती है. बच्ची की मां का पता लगाने के लिए सभी प्रेग्नेंट ख्वातीन की मालूमात ली जा रही है.

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