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राजद के बागी एमएलए को मंजूरी कानून की बुनियाद पर : स्पीकर

बिहार एसेम्बली सदर उदय नारायण चौधरी ने राजद के 13 एमएलए को अलग ग्रुप के तौर में आखरी मंजूरी दिए जाने के फैसले को कानून की बुनियाद पर बताते हुए आज कहा कि इनमें से नौ एमएलए की तरफ से दोबारा दिए गए खत का वह तफ़सीश कर रहे हैं और उस पर दस्तूर

बिहार एसेम्बली सदर उदय नारायण चौधरी ने राजद के 13 एमएलए को अलग ग्रुप के तौर में आखरी मंजूरी दिए जाने के फैसले को कानून की बुनियाद पर बताते हुए आज कहा कि इनमें से नौ एमएलए की तरफ से दोबारा दिए गए खत का वह तफ़सीश कर रहे हैं और उस पर दस्तूरुल अमल फैसला लेंगे।

चौधरी ने आज यहां अपने रिहाइशगाह पर सहाफ़ियों से बात करते हुए कहा कि बिहार एसेम्बली के गुजिशता सेशन के दौरान 13 राजद एमएलए ने जदयू में शामिल होने को लेकर एक दरख्वास्त उन्हें दिया जिस पर अलग-अलग ढंग से तमाम लोगों से बात करके उसमें यकीन करने में दस दिनों का वक़्त लग गया। उन्होंने कहा कि वे और भी वक़्त लेना चाहते हैं, पर इनमें से कुछ एमएलए ने कहा कि वे अपना फैसला दे दें। इसके बाद गुजिशता 24 फरवरी को उन्होंने अपना फैसला दिया।

चौधरी ने इन 13 एमएलए को लेकर बिहार एसेम्बली की तरफ से जारी खत को दिखाते हुए कहा कि इस खत के जरिये उन्होंने इन एमएलए को अलग ग्रुप के तौर पर आखरी मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि मुल्क और बाइरुल मुल्क की जो रिवाज रही है कि अकसरियत को अहमियत दिया जाए और बिहार एसेम्बली में राजद के 22 एमएलए में से 13 ने लिखकर दिया कि उन्हें या तो जदयू में शामिल कर दिया जाए या फिर अलग ग्रुप के तौर पर मंजूरी दी जाये। चौधरी ने कहा कि कल इन 13 एमएलए में 9 ने फिर खत लिखकर दिया है जिसका वह मुताला कर रहे हैं और उस पर मुनासिब फैसला कानून के मुताबिक लेंगे। राजद सरबराह लालू प्रसाद के उस इल्ज़ाम में कि कल इन 13 में से 9 एमएलए के साथ उनके बिहार एसमेबली पहुंचने पर एवान के सदर फरार हो गए चौधरी ने कहा कि वह एक कानूनी ओहदे पर हैं। ऐसे में वह कैसे उसे छोडकर भाग सकते हैं।

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