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राजस्थान में 100 साल क़दीम मस्जिद शहीद, वक़्फ़ बोर्ड का मुश्तबा किरदार

एक 100 साल क़दीम बगै़र छत की मस्जिद जो राजस्थान के ज़िला भिलवाड़ा (bhilwara)के देहात पर की एक पहाड़ी की चोटी पर क़ायम थी, शहीद कर दी गई। ये मसला रियास्ती वक़्फ़ बोर्ड के किरदार को भी मुश्तबा बना देता है क्योंकि इसने एक ग्रुप को इसकी इजाज़त दी थी

एक 100 साल क़दीम बगै़र छत की मस्जिद जो राजस्थान के ज़िला भिलवाड़ा (bhilwara)के देहात पर की एक पहाड़ी की चोटी पर क़ायम थी, शहीद कर दी गई। ये मसला रियास्ती वक़्फ़ बोर्ड के किरदार को भी मुश्तबा बना देता है क्योंकि इसने एक ग्रुप को इसकी इजाज़त दी थी जो मुबय्यना तौर पर मुक़ामी मुसलमानों की नुमाइंदगी करता था।

जिंदाल सा लिमेटेड और पी जंदाल ग्रुप की मिल्कियत है, जिसने अंजुमन कमेटी पर देहात को 65 लाख रुपये 19 अप्रैल को मस्जिद की शहादत के मुआवज़ा के तौर पर अदा किए। कंपनी ने अदायगी की रसीद जो अंजुमन की जानिब से जारी की गई है, पेश कर दी। मस्जिद की शहादत आला सतही वक़्फ़ बोर्ड कारकुनों से गठजोड़ के बगै़र नामुमकिन है।

ऐसा मालूम होता है कि वक़्फ़ बोर्ड ने इस सौदे की मंज़ूरी दे दी थी। किसी जगह मस्जिद तामीर की जाए तो शरई गुंजाइशों के मुताबिक़ ये हमेशा मस्जिद बरक़रार रहती है और उसे शहीद करने का किसी को भी हक़ हासिल नहीं होता। सदर नशीन वक़्फ़ बोर्ड लियाक़त अली ख़ान ने अंजुमन का मकतूब वसूल होने के बाद मुबय्यना तौर पर मस्जिद शहीद करने की इजाज़त दी थी।

इस तरह वक़्फ़ बोर्ड का किरदार भी इस सिलसिला में मुश्तबा हो जाता है।

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