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राजीव गांधी के क़ातिलों को रिहा ना करने वज़ीर-ए-आज़म की हुकूमत तमिलनाडु को हिदायत

राजीव गांधी के क़त्ल को हिन्दुस्तान की रूह पर हमले के मुतरादिफ़ क़रार देते हुए वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह ने आज कहा कि क़ातिलों की रिहाई इंसाफ़ के तमाम उसोलों के मुग़ाइर होगी। उन्होंने हुकूमत तमिलनाडु को हिदायत दी कि वो रिहाई की कार्रवाई पर

राजीव गांधी के क़त्ल को हिन्दुस्तान की रूह पर हमले के मुतरादिफ़ क़रार देते हुए वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह ने आज कहा कि क़ातिलों की रिहाई इंसाफ़ के तमाम उसोलों के मुग़ाइर होगी। उन्होंने हुकूमत तमिलनाडु को हिदायत दी कि वो रिहाई की कार्रवाई पर पेशरफ़त ना करे क्योंकि ये क़ानूनी एतबार से काबुल अमल नहीं है। वज़ीर-ए-आज़म ने अपने एक बयान में कहा कि कोई भी हुकूमत या किसी भी पार्टी को दहश्तगर्दी के ख़िलाफ़ जंग में नरमी इख़तेयार नहीं करनी चाहिए।

वो वाज़िह तौर पर तमिलनाडु की अना डी एम के हुकूमत का हवाला दे रहे थे जिस ने राजीव गांधी क़त्ल केस के 7 मुजरिमों की सज़ाए मौत को सुप्रीम कोर्ट की जानिब से उम्र क़ैद में तबदील करने के बाद उनकी रिहाई का फ़ैसला किया है। अपने बयान में वज़ीर-ए-आज़म ने कहा कि हुकूमत ने सुप्रीम कोर्ट में क़ानून के बुनियादी मसाइल के मौज़ू पर एक दरख़ास्त नज़रेसानी पेश की है।

उन्होंने कहा कि मर्कज़ तमिलनाडु हुकूमत को इत्तिला दे चुका है कि राजीव गांधी के क़ातिलों की रिहाई का उनका मंसूबा क़ानूनी एतबार से नाक़ाबिल अमल है और इस पर मज़ीद पेशरफ़त नहीं की जानी चाहिए। जया ललीता हुकूमत ने कल फ़ैसला किया था कि राजीव गांधी क़त्ल मुक़द्दमे के तमाम 7 मुजरिमों को आज़ाद कर दिया जाये क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इन में से 3 की सज़ाए मौत को उम्र क़ैद में तबदील कर दिया है।

राजीव गांधी के क़ातिलों को टाडा की एक अदालत ने जनवरी 1998 में मुजरिम क़रार देते हुए सज़ाए मौत सुनाई थी जिसकी 11 मई 1999 -ए-को सुप्रीम कोर्ट ने तौसीक़ करदी थी। तमिलनाडु हुकूमत के फ़ैसले पर रद्द-ए-अमल ज़ाहिर करते हुए मर्कज़ी वज़ीर-ए-क़ानून कपिल सिब्बल ने कहा कि साबिक़ वज़ीर-ए-आज़म का क़त्ल सिर्फ़ एक फ़र्द का नहीं बल्कि जम्हूरीया हिन्दुस्तान का क़त्ल था।

उन्होंने कहा कि वो नरेंद्र मोदी से एक वाज़िह सवाल करना चाहते हैं कि वो इस मसले पर ख़ामोश क्यों हैं? इससे ग़लत इशारा मिलता है। उन्होंने कहा कि वो सिर्फ़ उनका नहीं बल्कि पूरी पार्टी की जानिब से एक ग़लत इशारा है। कोई भी हुकूमत या सियासी पार्टी को दोहरे मयारों पर अमल नहीं करना चाहिए जबकि बात दहश्तगर्दी के ख़िलाफ़ जंग की हो।

वो एवाने पार्लियामेंट के बाहर एक प्रेस कान्फ्रेंस से ख़िताब कररहे थे। मर्कज़ी वज़ीर मनीष तीवारी ने कहा कि तमिलनाडु हुकूमत का इस मामले में रवैय्या अफ़सोसनाक है। सुप्रीम कोर्ट ने सज़ाए मौत को सज़ाए उम्र क़ैद में तबदील करते हुए हुकूमत तमिलनाडु पर बरअक्स फ़ैसला करने और मुख़्तलिफ़ फ़ैसलों की ग़लत तावील करने का इल्ज़ाम आइद किया।

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