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रामकृपाल ने पार्टी के तमाम ओहदे छोड़े, लालू पर लगाया इमोशनल ज़ुल्म का इलजामा

राजद सरबराह लालू प्रसाद के करीबी रामकृपाल यादव ने पाटलीपुत्र लोकसभा सीट से टिकट न दिये जाने की वजह से आज राजद के तमाम ओहदों से इस्तीफा दे दिया लेकिन कहा कि वह अभी भी पार्टी में हैं।

राजद सरबराह लालू प्रसाद के करीबी रामकृपाल यादव ने पाटलीपुत्र लोकसभा सीट से टिकट न दिये जाने की वजह से आज राजद के तमाम ओहदों से इस्तीफा दे दिया लेकिन कहा कि वह अभी भी पार्टी में हैं।

दो दिन पहले राजद ने उम्मीदवारों की ऐलान की थी जिसमें पाटलीपुत्र लोकसभा सीट से लालू की बेटी मीसा भारती को उम्मीदवार बनाया गया है। उसी वक़्त रामकृपाल ने पार्टी सरबराह की इस बात पर एतराज़ जतायी थी कि उन्होंने पाटलीपुत्र सीट से इंतिख़ाब लड़ने की इच्छा जाहिर नहीं की थी।

मीसा कल यादव को मनाने और समझाने के लिए उनके घर गयी और पांच घंटे तक वहां रही थीं। इस बारे में यादव ने कहा कि यह इमोशनल ब्लैकमेल की एक कोशिश थी।

यादव फिलहाल राज्यसभा के रुक्न हैं और पटना से वह तीन बार लोकसभा के लिए चुने जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि वह अब भी पार्टी में हैं और उन्होंने राज्यसभा की रुकनीयत से इस्तीफा नहीं दिया है।

उन्होंने कहा कि सामाजिक इंसाफ के असुलों को बनाए रखने के लिए तशकील की गई पार्टी की दिलचस्पी अब खानदानी इंसाफ में मालूम होती है। उन्होंने कहा कि कल मेरी बेटी मीसा भारती मेरे घर आयी थीं और कहा था कि वह पाटलीपुत्र सीट से इंतिख़ाब नहीं लडेंगी और मेरे लिए तबलिग करेंगी। मैं उसके दरख्वास्त को ठुकरा नहीं सका। लेकिन आज क़ौमी सदर ने साफ तौर पर कहा कि रेस में घोडा नहीं बदला जा सकता। मैंने उनसे कभी नहीं कहा था कि रेस का घोडा बदला जाये।

अब मुझे ऐसा लग रहा है कि कल जो मेरी बेटी मीसा भारती मेरे घर पर आयीं थीं, वह मेरे साथ इमोशनल ब्लेकमेल था। इसलिए गुस्से में नहीं बल्कि मजरूह होकर मैं पार्टी के तमाम ओहदे से इस्तीफा दे रहा हूं। प्रेस कोन्फ्रेंस में रामकृपाल यादव जज्बाती हो गये और रो पड़े। उन्होंने कहा कि अभी मैंने पार्टी छोडने का फैसला नहीं लिया है।

पाटलीपुत्र लोकसभा सीट से टिकट न मिलने पर रामकृपाल यादव के नाराज होने की खबरों के बाद लालू प्रसाद की बेटी मीसा भारती उनसे मिलने के लिए दिल्ली आयी थीं।

यादव ने सहाफ़ियों को बताया पार्टी और उसके कारकुनान के साथ मेरा गहरा जुड़ाव है। मुझे लगता है कि जिस तरह मीसा कल मेरे पास आयीं वह या तो इमोशनल ब्लेकमेल है या मेरे जैसे सीधे-सादे सख्स के खिलाफ किया गया सियासी स्टंट। उन्होंने कहा कि उन्होंने भरे दिल से इस्तीफा देने का फैसला किया और उनके तहरीरी इस्तीफे में यह बात साफ होगी।

बहरहाल, वह किसी दीगर पार्टी में शामिल होने या लोकसभा इंतिख़ाब लड़ने की एमकनात के बारे में कुछ भी कहने से बचे। उन्होंने सिर्फ इतना कहा दीगर फैसले बाद में किये जायेंगे। यादव ने कहा कि उन्होंने बहुत पहले पार्टी के क़ौमी सदर के सामने लोकसभा इंतिख़ाब लड़ने की अपनी ख्वाहिस ज़ाहिर की थी फिर भी ऐसा फैसला किया गया। उन्होंने कहा मैं चाहता था कि लोकसभा इंतिख़ाब लड़ूं। यह पार्टी कारकुनान और लोगों की मांग थी।

एक साल पहले मैंने पार्टी के क़ौमी सदर को अपनी जज़्बात से अगाह करा दिया था। मैंने यहां तक कहा था कि अगर मैडम को उम्मीदवार बनाया जाता है तो मेरे लिए यह ठीक ही होगा। लेकिन फैसला किया गया। फिर भी मैंने पार्टी के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा। लोकसभा इंतिख़ाब से पहले लालू प्रसाद की पार्टी में बेचैनी फैली हुयी है। गुजिशता माह राजद के 13 एमएलए ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था लेकिन बाद में एमएलए दल की बैठक में 9 एमएलए शामिल हुए थे।

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